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उम-फुन की आमद और कोलकाता

देवदीप मुखर्जी


कोलकाता
20 मई, 2020

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मितुल, भयानक एक दिन था यह...
मौसम की चेतावनी थी दोपहर तीन के बाद तेज और तेजतर होगा..
भोर रात से ही आकाश का मुंह भारी.. बादलों की शिव बारात से अटा.. सुबह ग्यारह से ही हल्की सांय सांय की आवाज के साथ हवा हिलती..
मौसम विभाग की तकनीक ने पिछले कुछ साल से अंदाज लगाने में तरक्की की है..फलत: तीन-चार लाख लोग पहले से ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिए गए..
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दोपहर के ढलते कदमों पर स्पेन के लाल शालू से ललचाए सांड का क्रोध ऊम-फुन पर..थाईलैंड ने कोई सोलह साल पहले,दो हजार बीस के इस पहले चक्रवात को अपनी भाषा में आकाश कहा..
ऊम-फुन ( आकाश ) भाषायी कतरब्योंत से आमफान हो गया...
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दोपहर दो तीन बजे से हवा और बारिश की जुगलबंदी..
और शुरु हुआ चक्कर चक्कर चकराते चक्रवात का तांडव.. हवा की सांय सांय सुनी थी पहले भी. इस दिन सुनी हवा की सीत्कार.. कभी कहीं सीटियां बजती.. कभी किसी बच्चे का रुदन..रुदाली...
सुना, इस दिन, घर लौटते पूरब का सामूहिक आर्तनाद मितुल...
*****
लगभग चार पांच घंटे गोल गोल पछीट मारता क्रुद्ध सागर जल, आकाश की ऊंचाइयों पर...शाम साढे सात के आसपास, अचानक सब कुछ थमता हुआ, शांत..
फिर फिर पूँछ लौटती, हल्की सिसकियों के साथ..
हवाई अड्डा जैसे तब्दील होती नदी,हैंगर पर टिके हवाई जहाज ज्यूं नाव.. सड़कें,घुटनों तक पानी में टिकी..
गिरते पेडों और बिजली के खम्बों से नेस्तनाबूद रोशनी ने बहुतलों का पानी सुखा दिया...
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सरकारी आंकड़ों में 72 या 82 मौतें.. कितने हजार मकान उजड गए.. सुना कि यह 1737 के बाद आया भीषण साइक्लोन था..
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दुःस्वप्न की तरह पीछा करती रहेगी हवा की वह रुदाली....


#ऊम_फुन_2020#
 

देवदीप

 

देवदीप जन सरोकार के कवि और लेखक हैं, पेशे से बैंकर। हर परिघटना पर उनकी गहरी दृष्टि और अभिव्यक्ति विरल है।
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