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गेंद

नीचे से ऊपर को जाती
ऊपर से नीचे को आती
लाल हरी और नीली गेंद

मम्मी पापा नाना नानी
रामू मीशू बबलू रानी
सबकी नयी सहेली गेंद

घर में पिछवाडे में खेली
गर्मी में जाडे में खेली
हर दिल की हरियाली गेंद

कभी जोर से टप्पा खाती
कभी लुढक़ती गिरती जाती
मन की बडी हठीली गेंद

छोटे छोटे कंचों जैसी
जप पूजा के मनकों जैसी
लकदक नयी नवेली गेंद

कहीं किसी को लग ना जाये
कांच ना टूटे डांट न खाये
मिल कर बडी संभाली गेंद

_ पूर्णिमा वर्मन
अगस्त 24, 2000


 

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