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अपने क्रोध को समझें - 2

विचारात्मक पुर्ननिर्माण

बस इतना करें कि अपनी विचारधार में बदलाव लाएं
क्रोधवान व्यक्ति बुरा-भला कहते हैं, बदजबान हो जाते हैं और अतिरंजित भाषा में बात करते हैं जो कि उनकी आन्तरिक अवस्था को प्रतिबिम्बित करता है जब आप नाराज होते हैं तब आपकी सोच अतिवादी हो जाती है, आप हर चीज बढा-चढा कर बडे नाटकीय ढंग से कहने लगते हैं ऐसे में आप इन अतिवादी विचारों में बदलाव लाकर थोडा और संतुलित विचारों को तवज्जोह दीजिये जैसे कि अपने आप से यह कहने की जगह  '' ओह सबकुछ कितना घृणित है, दुखदायी है या सब कुछ बरबाद हो गया'' कहें कि '' माना यह हताशाजनक है, शायद इसीलिये मैं परेशान हूं पर यहां आकर दुनिया तो नहीं खत्म हुई ना गुस्सा होने से बिगडा काम नहीं बिगडने वाला इसके लिये फिर कोशिश करनी होगी''

'' कभी नहीं'' और '' हमेशा'' जैसे शब्दो के इस्तेमाल में ध्यान रखें जब आप अपने बारे में या किसी और के बारे में बात कर रहे हों जैसे '' ये कमबख्त मशीन कभी काम नहीं करती!'' या '' तुम्हारा क्या है, तुम तो हमेशा चीजें भूलते आए हो!'' ऐसी बातें हमेशा आपके गुस्से को बढावा देंगी और आप समझेंगे कि आपका गुस्सा जायज है और आप सोचेंगे कि अब इस समस्या का कोई हल नहीं जो कि आपको और खीज देगा।

हमेशा अपने आपको याद दिलाते रहें कि नाराज होना किसी भी बिगडी बात को सुधार नहीं सकता और न ही इससे आप अच्छा और बेहतर महसूस कर सकते हैं बल्कि गुस्से के बाद आप और बुरा महसूस करते हैं

तर्क गुस्से को कम करता है, क्योंकि गुस्सा जब जायज होता है तभी आपे से बाहर हो जाता है अत: गुस्से की अवस्था में स्वयं से तर्क करें स्वयं को याद दिलायें कि '' सारी दुनिया आपके हिसाब से नहीं चल सकती आप बस रोजमर्रा की जिन्दगी के कुछ कठिन हिस्सों के रू ब रू हो रहे हैं'' यह हमेशा अपने आपको याद दिलाएं, यह गुस्से के कोहरे में से आपके अपने स्व की पहचान के लिये आवश्यक है इससे आपके विचार संतुलित होंगे क्रोधित व्यक्तियों की मांग होती है: न्याय, सराहना, सहमति और अपना मनवांछित करने की इच्छा हर कोई यह सब चाहता है, हम सब आहत होते हैं जब हमें यह सब नहीं मिलता, पर क्रोधित व्यक्ति इन चीजों की अपेक्षा करता है जो कि इस विपरीत लोगों से भरी दुनिया में संभव नहीं, ऐसे में उनकी असंतुष्टी क्रोध में बदल जाती है वैचारिक पुर्ननिर्माण के तहत क्रोधित व्यक्ति को अपने अधिक अपेक्षाओं वाले व्यवहार की जानकारी होनी चाहिये और इन अपेक्षाओं को इच्छाओं में बदल कर देखना चाहिये, जैसे कि , '' मैं चाहता हूं, मेरे लिये यह होना चाहिये  '' के स्थान पर '' मुझे अच्छा लगता अगर ऐसा होता '' ज्यादा स्वस्थ तरीका है अपनी बात कहने या मनवाने का

जब आप मनवांछित पाने में असफल होते हो तो आप हताशा, असंतोष और आहत होना महसूस करते हो ना कि क्रोध किन्तु कुछ क्रोधवान व्यक्ति गुस्से को अपने आहत भाव दबाने के लिये इस्तेमाल करते हैं आप आहत हैं इसका अर्थ नहीं कि आप दूसरों को भी आहत करें

समस्या का निदान

क्रोध हमेशा नाजायज नहीं होता कभी कभी हमारा क्रोध और हताशा जीवन की किसी बहुत वास्तविक और उलझी हुई समस्या से उपजता है और यह अकसर इन असंभव सी परिस्थितियों की प्रतिक्रियास्वरूप स्वस्थ और प्राकृतिक होता है और यह सर्वमान्य तथ्य कि  हर समस्या का निदान होता है जो कि कभी कभी गलत भी साबित होता है, हमारी हताशा और खीज में वृध्दि करता है ऐसी स्थिति में सबसे अच्छा उपाय है कि आप समस्या के निदान को खोजने की जगह समस्या के सामना करने तथा इसके परिणामों से निबटने के बारे में सोचें

एक रूपरेखा बनाएं और अपने विकास की दर को देखते चलें और अपने प्रयासों द्वारा सबसे अच्छा कर दिखाने का प्रण कर लें, किन्तु स्वयं को सजा देने कि न सोचें अगर आपको अपनी सोची हुई हद तक सफलता न मिले तो बीच बीच में आपका धैर्य भी जवाब दे सकता है, समस्या का हल भी निकलता हुआ ना प्रतीत हो पर आप निराश न हों , कम से कम आपने अपने अच्छे उद्देश्य के लिये प्रयास तो किये ना!

बेहतर सवांद कायम करें

क्रोध में व्यक्ति सीधे निष्कर्षों की ओर ही जाता है, जबकि ऐसे में कई निष्कर्ष गलत या आधे सच हो सकते हैं सबसे पहले गर्मागर्म बहस छोड क़र ठण्डे दिमाग से सोचें एकदम से वही न कह दें जो सबसे पहले आपके दिमाग में आए, पहले सोचें कि आप आखिर कहना क्या चाहते हैं सामने वाले की सुनें और उत्तर देने से पहले सोचने का समय लें
सुनें भी, यह जानने के लिये कि आखिर गुस्से की तह में है क्या
माना कि आप किसी विशेष किस्म की आजादी और अपना व्यक्तिगत स्थान चाहते हैं, और आपका साथी विशेष आपसे और जुडाव और नैकटय चाहता हैऔर ऐसे में अगर वह आपकी गतिविधियों के बारे में शिकायत करता है तो आप उसे एकदम से जेलर या वार्डन या एक गले में लिपटा एक फंदा ही न समझ लें

जब आप की आलोचना होती है तो यह सहज और प्राकृतिक है कि आप अपनी रक्षार्थ अपने विचार रखने को उत्सुक हो उठते हो, पर इसके लिये लडना आवश्यक नहीं, बल्कि आप सुनें कि शब्दों के नीचे क्या भावना निहित है हो सकता है वह व्यक्ति उपेक्षित महसूस कर रहा हो आपकी ओर से यह समय नहीं कि आप अपनी ओर से प्रश्न उठाएं, धैर्य रखें अपने और साथी के मतभेद को क्रोध में न बदलने दें अपना संयम रखें और परिस्थिति को उलझने से बचाएं

हास्य का प्रयोग करें

मजाक और हल्के फुलके मजेदार वाक्य गुस्से को ठण्डा करने में कई तरह से सहायक होते हैं
पहली बात यह आपको अधिक संतुलित तरीके से बात को समझने में सहायता करेगा माना कि आप नाराज हैं किसी से ऐसे में आप उस व्यक्ति के बारे में कोई मजदार कल्पना करें किसी मुहावरे को उसके बारे में सही अर्थ करके सोचें कि '' ये तो अपनी अक्ल के पीछे लठ्ठ लेकर घूमता है'' आप उसकी कल्पना करें कि अक्ल के पीछे लठ्ठ लिये चला जा रहा है या कुछ औरऐसी मजेदार कल्पनाएं और हास्य हमेशा गुस्से और तनावग्रस्त दिमाग के हल्का करते हैं

अत्यधिक क्रोधित स्वभाव वाले लोगों के लिये डॉ डेफनबेकर कहते हैं कि वे हमेशा सोचते हैं कि  हमेशा परिस्थितियां उनके बस में हों, उनके कहे में सब चलें क्रोधित व्यक्ति अकसर यह महसूस करते हैं कि वे ही नैतिक रूप से सही हैं, और उनके कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें कोई बदलाव असहनीय होता है, और उन्हें लगता है कि बस उन्हें इस तरह से परेशान नहीं होना चाहिये बाकि लोग हों तो हों पर वे इन परेशानियों के लिये नहीं बने हैं

जब आपमें ऐसी इच्छा जागरत होती है, वे सलाह देते हैं कि, अपनी कल्पना में चित्रित करें कि आप भगवान हैं, एक सर्वश्रेष्ठ दुनिया का संचालक और सारी दुनिया आपकी है सडक़ें, दुकानें, ऑफिस आदिआप अकेले घूम रहे हैं वहां सारी परिस्थितियां आपके हाथ हैं पर आपके साथ कोई नहीं है ऐसी कल्पना करके आप अपनी गलतियां और अपनी नाराजग़ी के गलत कारणों को जान जाएंगे आप यह भी जान जाएंगे कि आप कितनी तुच्छ और महत्वहीन बातों पर नाराज होते आए हैं यहां दो बातें याद रखें हास्य के प्रयोग में कि अपनी समस्याओं पर बस हंस के ही न रह जाएं समस्या को सुलझाना आप ही को है अत: हास्य को रचनात्मक सोच में प्रयुक्त करें किसी पर आहत करने वाला व्यंग्य ना करें यह गुस्से के प्रदर्शन का दूसरा अस्वस्थ तरीका है

इन सभी क्रोध शान्त करने की प्रणालियों में एक ही बात है वह यह कि स्वयं के क्रोध को बहुत गंभीरता से न लें क्रोध एक गंभीर भाव है, किन्तु सोचा जाए तो क्रोध में भी शान्त रह कर या हंस कर काम लिया जा सकता है

अपना परिवेश बदल कर देखें

यह बात असंभव लग सकती है, किन्तु कभी कभी हमारे आस पास का परिवेश हमें खीज और गुस्सा दिलाता रहता है समस्याएं और जिम्मेदारियां आप पर बोझ बन कर आपको क्रोध का शिकार बना सकती हैं स्वयं को एक अवकाश दें यह तय कर लें कि आपका अपना भी दिन भर में कोई व्यक्तिगत समय हो खासतौर से उस दिन जब आप बहुत परेशान हों उदाहरण के लिये कामकाजी मां को यह नियम बना लेना चाहिये कि जब वह काम से घर लौटे तो पन्द्रह मिनट कोई मम्मी से बात नहीं करेगा जब तक कि कोई बहुत बडी विपदा ही न आ पडेऌससे वह बेहतर महसूस करेगी और वह बच्चों के ह प्रश्न और हर मांग का उत्तर देने में चिढचिढाएगी नहीं

कुछ और तरीके स्वयं को शान्त करने के

समय निर्धारण

अगर आप और आपके जीवनसाथी में रात में बातचीत के समय अकसर झगडा होता है तो इसका अर्थ है कि आप दोनों या दोनों में से एक थका हुआ है अत: समय में बदलाव लाएं अपने घर के या बाहर के महत्वपूर्ण मसलों के बारे में बातचीत रात में न करके दिन के किन्हीं अन्य समय में करें, ताकि ये बातें बहस और फिर लडाई में न बदल जाएं

उपेक्षित करें

अगर आपको बच्चे का बिखरा हुआ कमरा आते जाते खिजाता है और किसी के पास समय नहीं उसे ठीक करने का तो आप उसके कमरे का दरवाजा ही बंद कर दें यह न सोचें कि बच्चे का कमरा है वह जाने बल्कि स्वयं को शान्त रखें

विकल्प खोजें

अगर रोज आपको काम पर आते जाते ट्रैफिक की परेशानियों का सामना करना पडता है और आप चिढचिढा जाते हैं दिन के पहले पहर में ही तो आप नक्शे में कोई बेहतर रास्ता खोज लें जो कि कम भीड भाड वाला और सुन्दर दृश्यों वाला हो चाहे थोडा लम्बा सही या कोई और विकल्प खोजें जैसे बस या ट्रैन

क्या आपको विशेषज्ञ की सलाह की आवश्यकता है?

अगर आप महसूस करते हैं कि आपका गुस्सा आपे से बाहर हो रहा है, अब आप इसे कन्ट्रोल नहीं कर पाते और यह आपके दाम्पत्य पर और जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर असर डालने लगा है तो आप अवश्य सलाहकार या मनोविश्लेषक के पास जाएं और परिस्थितियों को सही तरीके से निबटने और गुस्से को सही तरीके से प्रदर्शित करने का तरीका सीखें एक मनोवैज्ञानिक या लाईसेन्सशुदा मानसिकस्वास्थ्य चिकित्सक आपकी नये तरीकों और प्रणालियों से आपकी व्यवहारगत कमियों से उबरने में सहायता कर सकता है

जब आप चिकित्सक से बात करें तो उसे स्पष्ट बताएं कि आप को क्रोध की समस्या है और आप गंभीरता से इस विषय पर काम करना चाहते हैं उससे पूछें कि क्रोध पर काबू के लिये वह आपकी किस तरह से सहायता करेगा उसकी विधि क्या है यह आपको मानना ही होगा कि यह मात्र एक इलाज का तयशुदा कोर्स नहीं कि आपका इलाज हुआ और आप सही सही व्यवहार करने लगेंगे यहां चिकित्सक का प्रयास यह होगा कि वह आपको काउन्सलिंग के जरिये आपसे बातें कर आपके अवचेतन को जाने और आपकी समस्या के मूल कारण कोआपके समक्ष रखे माना कि समस्या के निदान के लिये वह आपको कई रास्ते सुझाएगा पर वह आप ही को सप्रयास करना होगा मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि एक अतिक्रोधवान व्यक्ति भी 8 या 10 सप्ताह में मध्यम दर्जे के क्रोध तक कम हो सकता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि परिस्थितियां क्या रहें और क्या प्रणाली का इस्तेमाल हुआ हो

स्वीकार करने का अभ्यास

यह सच है कि गुस्से वाले व्यक्ति को परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखना चाहिये, आक्रामक होने के बजाय
किन्तु ज्यादातर इस विषय से सम्बंधित किताबें व कोर्सेज उन लोगों के लिये हैं जो ज्यादा गुस्सा महसूस नहीं करते किन्तु इन किताबों में परिस्थितियों को स्वीकार करने की कुछ विधियां गुस्से वाले लोगों के लिये भी सहायक हो सकती हैं
याद रखें आप गुस्से से छुटकारा तो नहीं पा सकते, ना ही यह स्वस्थ तरीका है
आपके सारे प्रयासों के बावजूद आपको गुस्सा दिलाने वाली परिस्थितियां, लोग और चीजें आपकी जिन्दगी में हमेशा रहेंगीकभी कभी आपको जायज ग़ुस्सा भी आएगा क्योंकि जीवन हताशाओं, पीडा, खोने के अहसास से भरा हैआप इसे बदल नहीं सकते किन्तु आप स्वयं को और अपने तरीकों को बदल सकते हैं कि यह सब चीजें आपको कम से कम प्रभावित करें अपने क्रोधित भावों को दबाने से आप ज्यादा दु:खी महसूस कर सकते हैं अत: अपने बस तरीकों को बदल दें

मूलकथा एंव ग्राफिक - स्मिता वी
अनुवाद: मनीषा कुलश्रेष्ठ

 
 

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