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महिला पुलिसकर्मी हैं तो सही लेकिन दिखती नहीं : किरण बेदी वह 57 की उम्र पार चुकी है, लेकिन हौंसले आज भी बुलंद है। खासकर जब बात महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों की होती है तो वह जोरदार शब्दों में कहती हैं, ''औरतों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी।'' देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और मौजूदा समय में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ?यूरो की महानिदेशक डा किरण बेदी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने से पूर्व आईएएनएस को एक खास बातचीत में बताया कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को लेकर उन्होंने हाल ही में एक सर्वे कराया था। डा. बेदी ने कहा कि सर्वे के नतीजों से पता चला है कि वर्तमान में लोगों की मानसिकता बन गई है कि दिल्ली जैसे महानगरों में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। डा. बेदी कहती हैं कि समाज को अपनी इस सोच को बदलना होगा। कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी डा. बेदी को अफसोस है कि दिल्ली के पुलिस महकमे में महिला पुलिसकर्मियों को आज भी थोड़ा पीछे ही रखा जाता है। बकौल बेदी ''दिल्ली में महिला पुलिसकर्मी हैं तो सही लेकिन वे दिखती नहीं हैं।'' बेदी के मुताबिक वीआईपी डयूटी, हवाई अड्डों में यात्रियों की सुरक्षा जांच व नेताओं की रैलियों आदि में ही महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती अपेक्षाकृत अधिक की जाती है। क्या हमारे देश में सरकार पुलिस महकमे में महिलाओं की भर्ती को लेकर थोड़ी उदासीन है? इस प्रश्न के जवाब में डा बेदी कहती हैं कि पुलिस मुख्यालय में बैठे आला अफसरों को इस संदर्भ में ठोस नीतियां बनानी होगी। डा बेदी कहती हैं कि जब तक वे लोग पहल नहीं करेंगे, तब तक सरकार भी कुछ नहीं कर सकेगी। अगर बात समाज सेवा की करे तो भी डा बेदी को नहीं भुलाया जा सकता है। देश भर में नशामुक्ति के लिए अभियान चला रही डा बेदी मानती है कि युवाओं के बीच शराबखोरी की लत बढी है। कुछ समय पहले दिल्ली का पुलिस आयुक्त न बनने से डा बेदी काफी खफा हुई थी। लेकिन फिलहाल वह इस प्रकरण को पूरी तरह से भूल चुकी हैं। डा. बेदी कहती हैं, ''वह मेरा इतिहास था और मैं अब इतिहास को भूला कर वर्तमान में जी रही हूं।''
इंदु
शर्मा इंडो-एशियन न्यूज सर्विस |
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