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अब कला-संस्कृति केंद्र भी
माफिया की गिरफ्त में!

लखनऊ में अब कला एवं संस्कृति केंद्र भी माफियाओं की सख्त गिरफ्त में आ गए हैं। पहले संगीत सम्राट नौशाद और अब मशहूर शायर एवं साहित्यकार कैफी आंजमी इसकी ताजा मिसाल बन गये हैं। नौशाद के नाम पर बने नौशाद संगीत केन्द्र को मैरिज लॉन के रूप में किराये पर चलाने का सिलसिला तो पहले से ही जारी था किन्तु अब कैफी आंजमी के नाम पर चल रहे कैफी आंजमी अकादमी में भी शादी-ब्याह होने लगे हैं।

राजधानी के पेपर मिल कालोनी के निकट 6400 वर्ग फीट में कैफी आंजमी अकादमी बन रही है। जिसके तहत एक प्रेक्षागृह, एक सेमिनार हॉल और एक लाइब्रेरी का निर्माण होना है। अकादमी के लिए लखनऊ नगर निगम ने जमीन और अपने रिवाल्विंग फण्ड से बीस लाख रुपये दिये। कैफी आंजमी की बेटी शबाना आंजमी ने अपनी सांसद निधि से 25 लाख रुपये दिये। संस्कृति विभाग ने 1.33 करोड़ दिये जबकि लगभग 1.35 करोड़ रुपये अवस्थापना निधि से लिया जाना है।

इस अकादमी का निर्माण अभी चल ही रहा है कि तीन दिन पहले यहां एक शादी का आयोजन हो गया। निर्माण कार्य करा रहे सहायक अभियंता ओ.पी. त्रिपाठी ने इस बारे में पूछे जाने पर आईएएनएस को बताया कि स्थानीय  भाजपा विधायक विद्यासागर गुप्ता के इशारे पर भाजपा के एक मण्डल अध्यक्ष ने यहां विवाह आयोजित कर लिया। नगर आयुक्त शैलेश कुमार सिंह ने इस मामले की जांच के आदेश दिये हैं।

उल्लेखनीय है कि इसके पहले संगीत सम्राट नौशाद के नाम पर खुर्रमनगर में बने नौशाद संगीत केन्द्र को संगम मैरिज लॉन में बदल दिया गया। इस केन्द्र के लिए 10 हजार वर्ग फीट जमीन सरकार ने दी और वहां एक भवन का निर्माण भी कराया। इस सिलसिले में तत्कालीन रायपाल मोतीलाल वोरा ने निजी दिलचस्पी ली थी। यह अलग बात है कि नौशाद संगीत केन्द्र में कभी तबले की थाप या हारमोनियम की गूंज तो नहीं सुनायी दी अलबत्ता ब्रासबैण्ड का शोर वहां जरूर सुनने को मिलता रहता है।

हैरत की बात तो यह है कि नौशाद साहब ने अपने जीवन में ही अपने नाम पर बने संगीत केन्द्र के दुरुपयोग को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती, तत्कालीन रायपाल विष्णुकांत शास्त्री और तत्कालीन नगर विकास मंत्री लालजी टण्डन को पत्र भी लिखा। अंग्रेजी में लिखे अपने पत्र में नौशाद साहब ने अपील की थी कि सरकारी धन और सम्पत्ति का दुरुपयोग रोका जाय और अगर ऐसा करना मुमकिन न हो तो कम से कम उनका नाम तो संगीत केन्द्र से हटा ही दिया जाय।

खुद नौशाद इस दुनिया से चले गये लेकिन उनकी यह मुराद पूरी न हो सकी और अब लगता है कि कला माफियाओं की नजर कैफी आंजमी पर भी पड़ गयी है। कभी 'कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' जैसा गीत लिखने वाले कैफी आंजमी को भी शायद अंदाजा न रहा होगा कि उनके जाने के बाद साथी क्या करने लग पड़ेंगे।

9 दिसम्बर 2007

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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