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परीकथाओं की तरह दिलचस्प थे नूरजहां के रोमानी किस्से

(23 दिसंबर को नूरजहां की पुण्यतिथि पर विशेष) 

मल्लिका-ए-तरन्नुम के रूप में विख्यात नूरजहां अपने पति शौकत रिजवी से बेपनाह मुहब्बत करती थीं, लेकिन उनकी जिंदगी में कई पुरुषों के रुमानी दखल की चर्चा भी कम दिलचस्प नहीं रही।

एक ओर तो वह अपने पति के पास फटकने की जुर्रत करने वाली किसी लड़की को सबक सिखाने से भी परहेज नहीं करती थी, वहीं उन्हें दूसरों को अपने ऊपर फिदा हो जाने की छूट देने या खुद किसी की दीवानगी में रंग जाने से उन्हें परहेज नहीं था। पाकिस्तान के जाने-माने फिल्म समीक्षक ऐजाज गुल की पुस्तक 'मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां द मेलोडी क्वीन', जिसे दिल्ली की प्रकाशन कंपनी वितस्ता पब्लिश्ंगि प्रा.लि. ने प्रकाशित की है, में नूरजहां के रुमानी रिश्ते के कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर किया गया है।

नूरजहां की सबसे पहले एक खूबसूरत और महत्वाकांक्षी युवक शौकत रिजवी से मुहब्बत हुई। शौकत नूर पर इस कदर फिदा थे कि उन्हें नूरजहां पर किसी की छाया पड़ते देखना तक गवारा नहीं था। वह उन्हें अपनी बेशकीमती धरोहर तक मान बैठे थे। नूरजहां भी शौकत को खूब पसंद करती थी। एक फिल्म के सेट पर एक नई अभिनेत्री निघट सुल्ताना को शौकत से घुलते मिलते देख नूरजहां को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने उसे फिल्म से बाहर करा दिया।

 खुद उनकी जिंदगी में कई असरदार लोगों का रुमानी दखल बना रहा। सिने हस्ती फिरोज नाजमी के भाई और किक्रेटर नजर मोहम्मद से उनके रिश्ते की खूब चर्चा हुई। कई अखबारों ने इन दोनों के अंतरंग रिश्ते की खबरें जमकर उछालीं। नूरजहां का उस वक्त जलवा ऐसा था कि जो भी असरदार व्यक्ति उनके करीब आता उनके साथ उसके रोमांस की खबरें छपने लगतीं। प्रोडयूसर असलम परवेज, फिल्म वितरक एम. मैम, निर्देशक हसन तारीक, संगीतकार नजीर अली और अभिनेता युसूफ खान, जिनके साथ वह हज करने गई थीं, से उनके प्यार की खूब चर्चा हुई।

कहा जाता है कि नूरजहां को 'दुपट्टा' नामक उर्दू फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेता अजय कुमार से मुहब्बत हो गई थी। एक खूबसूरत अभिनेता संतोष कुमार से उनके रिश्ते को लेकर खूब मसालेदार खबरें छपीं। कहते है कि नूरजहां संतोष का प्यार पाने को बेताब थीं लेकिन संतोष धर्मसंकट में फंसे रहे क्योंकि वह नूरजहां के पति शौकत का अपने पिता जैसा आदर देते थे।

नूरजहां प्रख्यात शायर फैज अहमद फैज को भी चाहती थीं, लेकिन वह इस रिश्ते को लेकर हमेशा ऊहापोह में रहीं। फैज को वह इतना चाहती थीं कि पाक सरकार की आपत्तियों के बावजूद वह कार्यक्रमों में फैज की शायरी की पंक्तियां दोहराने से परहेज नहीं करती थीं।

देश के सैन्य तानाशाह जनरल याह्या खान से उनके रिश्ते को लेकर काफी कुछ लिखा जा चुका है। पाकिस्तान विभाजन पर हमूदुर रहमान आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि नूरजहां का याह्या खान पर खास असर था। नूरजहां को इस रिपोर्ट में याह्या खान की कमजोरी कहा गया। तब भले ही नूरजहां मोटी और उम्रदराज दिखती थीं, पर याह्या खान के उन पर फिदा होने की खबरें खूब छपा करती थीं।

नूरजहां की आवाज के कायल थे मंटो, रूप और स्वभाव के नहीं

दुनिया न सिर्फ उनकी जादुई आवाज, बल्कि खूबसूरती पर भी फिदा रही है, पर कथा-साहित्य के किंवदंती पुरुष सआदत हसन मंटो की नजर में वह मल्लिका-ए-तरन्नुम तो थीं, पर खूबसूरती की देवी नहीं। चर्चा हो रही है गायिका नूरजहां की जिन्हें मंटो बददिमाग और नखरेबाज मानते थे।

 इस दिलचस्प तथ्य का खुलासा पाकिस्तान के प्रख्यात सिने समीक्षक और लेखक ऐजाज गुल की पुस्तक 'मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां द मेलोडी क्वीन' से होता है। मंटो नूरजहां के पति शौकत रिजवी के बेहद करीबी मित्र थे, इसलिए उन्हें अक्सर नूरजहां से मिलने-जुलने का मौका मिलता था। जहां तक संगीत की बात है तो मंटो नूरजहां को उस जमाने के शीर्ष गायक कुंदन लाल सहगल की टक्कर का कलाकर मानते थे। इस प्रख्यात लेखक ने नूरजहां की संगीत प्रतिभा से प्रभावित होकर 'नूरजहां सरूर-ए-जहां' नाम से एक पुस्तिका लिखकर उनकी गायकी को श्रध्दांजलि दी थी।

मंटो ने अपनी पुस्तिका में लिखा है, ''मैंने नूरजहां को परदे पर सबसे पहले खानदान फिल्म में देखा। मुझे उनकी सूरत में कुछ खास नजर नहीं आया। जहां तक आवाज की बात है तो वह इस मामले में सहगल और लता मंगेशकर से कम नहीं थी।''  मंटो को आजीवन यह सालता रहा कि उस जमाने के निर्माताओं ने सहगल और नूरजहां को साथ-साथ गवाने पर विचार क्यों नहीं किया?

 वह नूरजहां के संगीत के इतने जबर्दस्त प्रशंसक थे कि उन्हें यह अंदेशा सताने लगा था कि अगर नूरजहां ने शौकत से शादी कर ली तो बतौर गायिका वह खत्म हो जाएंगी और दुनिया एक जादुई आवाज से वंचित हो जाएगी। नई दिल्ली की वितस्ता पबलिशिंग प्राइवेट लि. नामक प्रकाशन कंपनी द्वारा प्रकाशित गुल की इस बेहद रोचक किताब के मुताबिक मंटो की नूरजहां से पहली मुलाकात तब की सफल सिने हस्ती बरकत नाजमी के फ्लैट में हुई थी। मंटो की नजर में नूरजहां नखरेबाज और रूपगर्विता थीं। मंटो ने अपनी पुस्तिका में लिखा है, ''एक बार मेरी पत्नी की सहेलियों ने मुझसे नूरजहां से मिलाने की जिद की। वह काफी जिद करने पर आईं। मैंने उनसे वहां जमा प्रशंसकों के लिए गाना गाने की भरपूर जिद की लेकिन वह नहीं गाने पर अड़ी रहीं। मेरी बात तो उन्होंने अनसुनी कर दी पर लोगों के दबाव में उन्हें गाना पडा। ''

मंटो नूरजहां को बेहद गुस्सैल और अक्खड़ स्वभाव की एक ऐसी महिला मानते थे जिसे अपने रूप को लेकर गलतफहमी हो गई थी। वह मानते थे कि नूरजहां का यही स्वभाव उनके और प्रशंसकों के बीच एक खास दूरी की वजह भी रही।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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