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किराये का इन्द्रधनुष

बम्बई की बरसात भी बस ! मुसीबत ही है। कहां तो सोचा था कि इन दो-तीन दिनों में पूरी बम्बई घूमूंगा। इस मायानगरी को खुद अपनी पहुंचने से देखूगा, जानूंगा और कहां ंसा पडा हूं इस गेस्ट रूम मेंजब से यहां आया हूं, यह झडी ज़ो लगी है, रूकने का नाम ही नहीं ले रहीइस कमरे में चहल-कदमी करते-करते थक गया हूं। लेटने की कई बार कोशिश की है परन्तु इतना नरम बिस्तर होते हुए भी तुरन्त उठ बैठता हूं। कमरे की एक-एक चीज को कई-कई बार देख चुका हूं। सारी पत्रिकाएं तो कल ही देख ली थीं, लेकिन मन में जो एक अजीब-सी कडवाहट घर कर रही है - गुस्से की, बेचैनी की, उससे वक्त काटना और भी मुश्किल हो रहा हैऔर ऊपर से यह बरसात, मेरे भीतर उठते तूफान को और तेज कर रही हैपता नहीं, कब तक इस कैद में रहना होगा

मैं इसे कैद क्यों कह रहा हूं ! यह इतना बढिया गुदगुदे मैट्रेस वाला डबल-बैड, आरामकुर्सियां, किताबों से अटी पडी अल्मारियां, शो-केस, अटैच्ड बाथरूम, जिसमें ठण्डे-गर्म पानी की सुविधा हैसब कुछ साफ-सुथरासब कुछ तो यहां है! क्या हुआ जो इस कमरे में समुद्र की ओर खुलने वाली कोई खिडक़ी नहीं हैऔर तो कोई कमी नहींफिर बम्बई जैसे महंगे शहर में तीन-चार दिनों के लिए इतनी अच्छी तरह से रहने और साथ में खाने-पीने की सुविधा को मैं कैद कह रहा हूं? जिसे मैं कैद कह रहा हूं कभी सपने में भी कफ परेड जैसे पॉश इलाके में 20 वीं मंजिल पर इतने आलीशान फ्लैट के गेस्ट रूम में रहने के बारे में सोच सकता थाक्या मेरी इतनी औकात है कि मैं इतनी खूबसूरत जगह में आराम से पसरा रहूं और चाय, नाश्ता सब कुछ मेरे कमरे में पहुंचा दिया आए और यह सब सेवा एक ऐसी नौकरानी करे जो मुझसे भी अच्छी अंग्रेजी बोलती है, और स्मार्ट तो इतनी है कि कल जब मैं दिन में यहां पहुंचा था और दरवाजा उसी ने खोला था तो मैं उसे खन्ना अंकल की लडक़ी रितु ही समझा था और उसे विश भी उसी के हिसाब से किया था

कल शाम को तैयार होकर जब कमरे से बाहर निकला तो उस वक्त आंटी ड्राइंग रूम में फोन पर किसी से बात कर रही थींमैं यही चाह रहा था कि कोई-न-कोई ड्राइंग रूम में मिल जाए, नहीं तो फिर किसी को बुलवाने के लिए या तो आवाज देनी पडती या फिर रूबी को ढूंढना पडताआंटी जब तक फोन पर बात करती रहीं, मैं वहीं सोफे की टेक लगाए खडा रहाफोन रखते ही जब वे मुडीं तो मुझ पर नजर पडीचेहरा एकदम तुनक नयाअभी तो फोन पर हंस-हंसकर बातें कर रही थीं !

- क्या बात है मनीश ! कहीं जा रहे हो क्या! उन्होंने चेहरे की तुनक कम किए बिना साडी क़ी प्लीट्स ठीक करते हुए पूछा था। मैं एकदम सकपका गया था, फिर भी हिम्मत जुटाकर बोला था - वो सुबह से कमरे में बैठा-बैठा बोर हो रहा हूं। इस समय शायद बरसात रूकी हुई है, सोच रहा था, कहीं घूम आऊं।
मैंने जानबूझकर कार और ड्राइवर की बात नहीं की थी। हल्की-सी उम्मीद थी कि शायद वे खुद ही ड्राइवर को बुलाकर मुझे घुमा लाने के लिए कह दें। वैसे भी तो आज दोनों गाडियां घर पर हैं। सुबह अंकल ही तो बता रहे थे। आंटी भीतर के कमरे की तरफ मुडते हुए बोली थीं - भई! यहां बरसात का कोई भरोसा नहीं होता। फिर भी जाना चाहो तो बिल्डिंग के सामने ही बस स्टॉप है। मैरीन ड्राइव या फाउंटेन वगैरह घूम आओ, लेकिन डिनर के वक्त तक लौट आना। रूबी को घर जाना होता है। बाहर जाने का मेरा सारा उत्साह खत्म हो गया था। लेकिन कमरे में बैठे-बैठे कुढते रहने से तो यही अच्छा था कि बरसात में ही घूमता भीगता रहूं, यही सोचकर - अच्छा आंटी कहकर मैं बाहर आ गया था।

लिफ्ट का बटन दबाने के बाद मैं आँखें मूंदे दीवार के सहारे खडा हो गया थामुझे बाउजी पर गुस्सा आने लगा था - क्यों भेजा उन्होंने मुझे यहां अपने वन-टाइम लंगोटिया यार और इस समय एक बहुत बडे दमी - कृष्ण गोपाल खन्ना के घर पर ठहरने के लिए? मैं कहीं भी दस-बीस रूपये वाले होटल वगैरह में ठहर जाताहां कम-से-कम मुझे हर वक्त ज़लील तो न होना पडतामुझे अपने आउटसाइडर होने का या मेरे छोटेपन का अहसास तो न कराया जाता और फिर उस हालत में मैं चार दिन के लिए थोडे ही आता इन्टरव्यू वाला दिन और उससे एक दिन पहले यानी दो दिन की बात होती और फिर मैं सेकेण्ड क्लास से आया हूं और वापसी की टिकट भी तो सेकेण्ड क्लास का बुक करवाया है, जबकि कम्पनी मुझे दोनों तरफ का फर्स्ट क्लास का किराया दे रही हैउससे जो पैसा बचता, वह रहने-खाने के काम आ जाता

लिफ्ट आ गई थीमैं नीचे आ गयासडक़ पर आने के बाद मैंने आस-पास देखा, पानी थमा हुआ था लेकिन लोग तेजी से आ-जा रहे थेमैंने यह बात सुबह भी नोट की थी, अब भी देख रहा था कि यहां पर लोग और शहरों की तुलना में ज्यादा तेज चलते हैं, कहीं देखते नहीं, बस लपकते से रहते हैंसुबह चर्चगेट के बाहर तो मैंने कई औरतों को भागते हुए देखा थाऔरतों को इस तरह भागते देखना सचमुच मेरे लिए एक नया दृश्य थाएक बहुत मोटी औरत, जिसने स्कर्ट पहना था, भागते हुए बहुत ही अजीब लग रही थी

अभी मुश्किल से मैंने सडक़ पार ही की थी कि एक तेज बौछार ने मुझे पूरी तरह भिगो दियालोगों ने फटाफट अपने फोल्डिंग छाते खोल लियेमुझे आस-पास कोई ऐसी जगह नजर नहीं आई जहां शरण ले सकताऊपर वापस जाने का कतई मूड न था नतीजतन भगता हुआ बस-स्टाप की तरफ ही चलता रहामूड और खराब हो गया थाअब घूमने की भी कोई तुक नहीं थीतुक तो मुझे पहले ही नजर नहीं आ रही थी क्योंकि मुझे यहां जगहों के सिर्फ नाम ही मालूम थे, उनकी दिशा या दूरी का कोई अन्दाज नहीं थाकिसी से कुछ भी पूछना बेकार लगा बस-स्टाप से पैदल चल पडा। यूं ही काफी देर तक भटकता और भीगता रहाभीगना मुझे अच्छा लगता है, लेकिन आज भीगने से मूड और भी बिगडता चला जा रहा थातभी कोलाबा वाली सडक़ पर एक अच्छा-सा बार दिखाई दियामुझे इस वक्त अपना अकेलापन काटने का इससे अच्छा कोई रास्ता नहीं दिखाई दियाबीयर बार में जा घुसाबीयर पीते हुए मुझे हमेशा इस बात का अहसास होता रहता है कि आसपास कोई है जिससे मैं अपने मन की बातें कह रहा हूं। हालांकि मैं उस समय बातें खुद से ही करता हूं। जो बात किसी से कहने को बेचैन हो रहा होता हूं, किसी के सामने मन की भडास निकालना चाहता हूं तो खुद से बातें करके बहुत सुकून पाता हूं। इस वक्त भी मुझे सुकून की जरूरत थी

बीयर के दो घूंट भरते ही मैं अन्तर्मुखी हो गयामेरे भीतर की सारी सुगबुगाहट बुलबुलों के साथ ऊपर आने लगीफिर से सारी चीजें दिमाग पर हावी होने लगींखुद पर गुस्सा आने लगा - क्यों ठहरा मैं खन्ना अंकल के घर परबाऊजी को कम-से-कम एक बार तो सोच लेना चाहिए था कि इन पंद्रह-बीस सालों में उनका दोस्त कितना बदल चुका होगाठीक है उनकी खतो-किताबत होती रहती है, लेकिन वह अलग बात है, और फिर मुझे इस बात से क्या मतलब कि खन्ना पर बाउजी के कितने अहसान हैं या दोनों बचपन के दोस्त हैं और दोनों ने मुफलिसी के दिन एक साथ काटे हैंबाउजी किस तरह अपनी और खन्ना की दोस्ती के चर्चे किए जा रहे थेअब मैं अगर बाउजी को बताऊं कि जिस दोस्त की उन्होंने अपने बच्चों का पेट काट कर मदद की थी, हां तक कि एक बार हम बच्चों के लिए दीवाली पर पटाखे न खरीदकर उनके लिए बम्बई टिकट तक जुटाया था, वह आज इतना बडा आदमी हो गया है कि उसके पास उसी दोस्त के लडक़े के लिए जरा-सा भी वक्त नहीं गर्मजोशी तो दूर, ढंग से बात करने तक की जरूरत ही नहीं समझी गयीये बातें सुनकर उन्हें कैसा लगेगा !

मैं बीयर पीते-पीते दुखी हो रहा थासुबह से आया हुआ हूं और कोई बात तक नहीं कर रहाआने पर ड्राइंग रूम में चाय पीते हुए जो दो-एक बातें हुई थीं, बाऊजी के हालचाल पूछे गए थे, उसके बाद तो मुझे जो गेस्ट रूम में पहुंचा दिया गया है, तब से वहीं घिरा बैठा थाअब बाहर निकला हूं। हां तक कि मेरा नाश्ता और खाना भी रूबी वहीं गेस्ट रूम में पहुंचा गई थीबीयर अपना काम कर रही थीमैं कुढ रहा था और सभी को दोषी मान रहा थामुझे माँ पर भी गुस्सा आ रहा था, क्यों उसने इतनी मेहनत करके खाने का सामान बना कर दिया है खन्ना के बच्चों के लिएउसे पता तो चले कि बम्बई के बच्चे ये सब चीजें नहीं खातेपता नहीं क्या खाते हैं ! आंटी हलवे पकवानों का डिब्बा देखते ही किस तरह मुंह बनाकर बोली थीं - क्या जरूरत थी इतना सब भेजने की? हां तो ये सब कोई नहीं खातारूबी ये तुम ले जाना अपने घर, और मैं अवाक रह गया था ! माँ ने कितनी मेहनत से यह बनाया थाकितने घंटे मेहनत करती रही थी बेचारी और बाऊजी भी तो जिद किए जा रहे थे, खन्ना को ये पसन्द है, वो पसन्द हैपता नहीं बम्बई में उसे ये खाने को मिलते होंगे या नहीं! देख लें न यहां आकर ! और रितु को देखो, क्या नखरे हैं! मंजू ने इतना शानदार कार्डीगन बनाकर दिया और वो किस तरह मुंह बनाकर बोली - मुझे नहीं पहनना ये सडा हुआ कार्डीगनऔर वह स्वेटर वहीं पटककर अपने कुत्ते को गोद में लिए अपने कमरे की ओर चली गई थीसच, उस समय तो मेरा खून ही खौल गया थामन हुआ था कि अभी अटैची उठाकर चल दूं कहीं औरसाला यह भी कोई तरीका है बात करने का! माना तुम लोग रईस हो गए हो ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में ब्लैक की कमाई करके बीस-तीस लाख के आदमी हो गए हो लेकिन इसका ये तो कोई मतलब नहीं है कि दूसरों की इस तरह इज्जत उतार लोअभी तो मुझे आए हुए कुल आधा घंटा ही हुआ था और किस तरह से यहां से मोहभंग हो गया था

मन में हल्की-सी तसल्ली भी हुई थी कि अगर हम रईस नहीं हैं तो कम-से-कम इन्सानी मूल्यों पर तो टिके हुए हैं, तहजीब से बात तो कर सकते हैंअब यही लोग मेरठ आए होते तो इनको बता देते कि मेजबानी क्या होती है! सारा परिवार इनकी जी-हुजूरी में एक टांग पर खडा होताक्या मजाल कि कोई जरा ऊंची आवाज में बोल कर तो दिखाएबाउजी की यही तो खासियत हैन तो किसी की बेइज्जती करते हैं, न अपनी होने देते हैंअब उनको मैं ये सब बताऊंगा तो देखना-खन्ना अंकल से बातचीत तब बंद न हुई तो बात है सवालों के जवाब मैं बीयर के घूंट भरते हुए खुद से पूछता रहाबीयर के सुरूर में खुद को, सबको कोसने के बाद मैं हलका महसूस कर रहा थासोचा, कल स्टेशन जाकर इंटरव्यू वाले दिन की टिकट की कोशिश करूंगा, ताकि फालतू में यहां दिमाग खराब न होता रहे

दरवाजा अंकल ने खोला था ड्राइंग रूम में हलकी रोशनी थीउनके हाथ में भरा हुआ गिलास था और ड्राइंग रूम के कोने में बने उनके शानदार बार में बत्ती जल रही थीबार स्टैण्ड पर आइस-बॉक्स, सोडा फाउन्टेन और खुली बोतल रखी थी
- यस, यंग मैन, उन्होंने अपने गिलास में से लम्बा
घूंट लेते हुए पूछा था - कहां घूमकर आ रहे हो?
-कहीं नहीं अंकल, बरसात की वजह से सारे दिन घर पर ही रहा, अभी जरा नीचे तक घूमने निकल गया था

मैं उनसे नजरें नहीं मिलाना चाहता था, क्योंकि मूड अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ था और मैं नहीं चाहता था कि उन्हें पता चले कि मैं बीयर पीकर आया हूं। वैसे भी अपनी और फजीहत करवाने की इच्छा नहीं थीबेशक अंकल ने कोई ऐसी बात नहीं की थी, जिसे मैं अन्यथा लेता, लेकिन वे सुबह हो रहे पूरे ड्रामे में तो मौजूद थेजब मैंने शहर देखने की इच्छा व्यक्त की थी तो वे भी तो मुझे गाइड कर सकते थे या रितु या ड्रायवर को मुझे घुमा लाने के लिए कह सकते थे, या फिर आंटी और रितु को चीजें रख लेने के लिए कह सकते थे

-तुम्हारा खाना तुम्हारे कमरे में रखा है, हमें पता नहीं था तुम कितने बजे तक लौटोगे।
उन्होंने गिलास खाली किया और तिपाई पर रखते हुए बोले थे
- हम डिनर पर बाहर इन्वाइटेड हैं। आंटी वगैरह जा चुके हैं। मैं तुम्हारे लिए ही बैठा था। वे उठ खडे हुए और बाहर जाते हुए बोले - ओकेयंग मैन, सी यू टुमारो, गुड नाइट।
मैं गुडनाइट कहकर अपने कमरे में आ गया था।

कोनेवाली मेज पर ढका हुआ खाना और पानी का जग वगैरह रखे हुए थे देखा-दो एक सब्जियां, चावल और रोटी थींभूख होने के बावजूद खाने की इच्छा नहीं हुईअगर मेरी इतनी ही चिन्ता थी तो मुझे उसी वक्त बता देते या कह देते, बाहर ही खा लेतालेकिन फिर सोचा-अगर मैं खाना न खाऊं और सुबह होने पर आंटी देखेंगी तो फिर भिनभिनाएंगी - एक तो स्पेशियली खाना बनवाया और छुआ तक नहींनहीं खाना था तो मना करके जातेऔर मैं खाना खाकर सो गया था

सबेरे से फिर वही रूटीन चल रहा है, बरसात हो रही है और मैं कमरे में बन्द हूं। रूबी एक बार सुबह पूछ भी गई थी वीडियो पर कोई फिल्म देखना चाहेंगेलेकिन मैंने मना कर दिया थाफिल्म देखने का मतलब है - ड्राइंग रूम में बैठना और ड्राइंग रूम चूंकि सभी कमरों के बीच में पडता है, अतः सबकी निगाहों के बीच बैठना मुझे कतई गवारा नहीं थारितु के कमरे से अब म्यूजिक की आवाज आनी बन्द हो गई है, लगता है कि किसी किताब वगैरह में मन लग गया होगा फर्स्ट ईयर में है रितु सुन्दर है, पर है अपनी माँ की तरह नकचढीएक ही नजर में आप मालूम कर सकते हैं - माँ-बाप की बिगडैल और जिद्दी लडक़ी हैबस ड्राइंग रूम में ही कल जो हैलो हुई थी, उसके बाद नजर तो कई बार आई है लेकिन आँखें न उसने मिलाई हैं न मैंने ही जरूरत समझी हैखासकर कार्डीगन वाले प्रसंग से तो मुझे उसकी शक्ल तक से नफरत हो गई है

इस घर में मुझे एक ही आदमी ढंग का लगा है - टीपूसत्रह साल का टीपू देखने में खासा जवान लगता है, स्मार्ट भी हैटैन्थ में पढता हैइतना अच्छा लडक़ा, लेकिन अफसोस कि वह गूंगा-बहरा हैसमझता है वह भी सिर्फ अंग्रेजी लिप मूवमेंट के सहारेअपनी बात माइमिंग से ही समझाता है या कभी-कभी लिखकर भीउससे आज बहुत ही शानदार ढंग से मुलाकत हुई इन्टरव्यू के सिलसिले में कुछ तैयारी कर रहा था कि दरवाजे पर वह दिखाई दियापहले तो मैंने पहचाना नहीं लेकिन जब अन्दर आ गया और उसने हाथ बढाया तो मुझे याद आ गयाकल जब मैं यहां पहुंचा तो वह स्कूल जा रहा थाशायद पैसों की किसी बात को लेकर आंटी उसे डांट रही थींबाऊजी ने भी मुझे उसके बारे में बताया था कि खन्ना उसकी ट्रेनिंग और पढाई की वजह से काफी परेशान रहते हैं

उसने बहुत गर्मजोशी से मेरा हाथ थामामुझे बहुत अच्छा लगाकोई तो है जो यहां शब्दों के बिना भी इतनी अच्छी तरह से कम्यूनिकेट कर रहा थाहम हाथ मिलाने भर में एक-दूसरे के मित्र बन गएमुझे उसका आना अच्छा लगावह अचानक उठा और दरवाजा बन्द कर आयाहालांकि उस वक्त हम दोनों और रूबी के अलावा घर में कोई और न थाउसने जेब से सिगरेट की डिब्बी और माचिस निकाली और एक सिगरेट ऊपर करके मेरे आगे बढायीअच्छा तो यह बात थी! सिगरेट कभी-कभार मैं पी लेता हूं। चार्म्स मेरा ब्रांड भी है, परन्तु यहां अंकल के घर पर रहने के कारण मैंने फिलहाल स्थगित कर रखी थीअब सिगरेट देखकर तलब तो उठी लेकिन एक सोलह-सत्रह साल के लडक़े के साथ इस तरह सिगरेट पीना न जाने क्यों अच्छा नहीं लगा - हालांकि ऑफर वही कर रहा थामेरे मना करने पर उसे आश्चर्य हुआउसके सिगरेट सुलगाने और पीने का अन्दाज बता रहा था कि वह पुराना खिलाडी हैउससे खुलकर बातें करना चाहता था पर कभी ऐसी स्थिति से वास्ता न पडा था कि माइमिंग के सहारे बात करनी पडे या ऊंची आवाज में अंग्रेजी बोलते हुए होंठों से सही मूवमेंट्स के जरिए अपनी बात समझानी पडे

उसने इशारे से पूछा - यहां किस सिलसिलें में आया हूं।
मैंने बताया य
हां एक कम्पनी में मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव के लिए इन्टरव्यू देना हैकल इन्टरव्यू है बेलार्ड पियर मेंतभी उसने अपनी जेब से एक लडक़ी की तस्वीर निकालीमुझे फोटो दिखाते हुए वह दिल पर हाथ रख कर मुस्कुरायामैं समझ गया कि वह उसकी स्वीट हार्ट की फोटो थीलडक़ी निश्चय ही सुन्दर और संवेदनशील लगीमैंने नाम पूछाउसने कागज लेकर उस पर बहुत सुन्दर अक्षरों में लिखा - उदिता, माई लवऔर कागज को चूम लियामुझे हंसी आ गईपूछा - तुम्हारे साथ पढती है क्याउसने सिर हिलाया - नहीं फ्रेंड की सिस्टर है - वह भी तुम्हें चाहती है क्या! मेरे पूछने पर उसने कुछ नहीं कहा, सिर्फ एक मिनट में आने का इशारा करके चला गयाथोडी देर में वापस आया तो उसके हाथ में कई चीजें थीं - दो तीन किताबें, एक खूबसूरत पेन, सेंट की शीशी, गॉगल्स और कई छोटे-मोटे गिफ्ट आइटमवह अपने हाथों में यह अनमोल खजाना लिए बहुत उल्लसित थामैंने पूछा और तुमने क्या दिया है उसेउसने आँख दबाकर कैमरा एडजस्ट और क्लिक करने की माइमिंग की

- लेकिन इतने पैसे कहां से लाए तुम? जो कुछ उसने बताया, वह मुझे चौंकाने के लिए काफी था।
नयी साइकिल बेचकर और घर में बताया कि खो गई।

मुझे उस पर तरस आया बेचारे को अपने प्यार का इजहार करने के लिए क्या-क्या करना पडता हैमैंने यूं ही पूछा - कभी फिल्म वगैरह भी जाते हो, लेकिन तुरन्त ही अपने सवाल पर अफसोस होने लगा - टीपू बेचारा कैसे इन्जॉय कर पाता होगालेकिन मुझे टीपू की मुस्कराहट ने उबार लियाउसने इशारे से बताया कि वे कई फिल्में एक साथ देख चुके हैंमैं कुछ और पूछता इसके पहले ही टीपू ने मुझे घेर लिया - आपकी कोई गर्ल फ्रैंड है क्या! पहुंचने के सामने मृदुभा का चेहरा उभर आया और याद आयी यहां आने से पहले उससे हुई आखिरी मुलाकातजब मैंने उससे पूछा था - तुम्हारे लिए क्या लाऊं बम्बई से, तो उसने कहा था - तुम सफल होकर लौट आना, मुझे और कुछ नहीं चाहिएमैं अभी उस मुलाकात के ख्यालों में ही डूबा था कि टीपू ने मेरा कंधा हिलाकर अपना सवाल दोहरायामैं मुस्करा दिया - हां है एकउसने तुरन्त नाम पूछा, क्या करती है, कैसी है

उसकी पहुंचने में चमक थीमुझे अच्छा लगा कि मैंने सिगरेट की तरह इस मामले में झूठ नहीं बोला हैमेरी गर्ल फ्रैण्ड की बात जानकर वह खुद को मेरे और करीब महसूस करने लगा थामैंने उसे बताया कि वह फिजिक्स में एमएससी कर रही है अभी

- और आप? उसने मुझसे पूछा।
-
हम तो भई, बीएससी के बाद से ही काम की तलाश में भटक रहे हैं।
उसने जेब में डिब्बी निकालकर एक और सिगरेट सुलगायी। तभी उसे कुछ याद आया। वह सिगरेट छोडक़र अपने कमरे में गया और जब वापस आया तो उसके हाथ में पासपोर्ट था। उसने बताया कि अगली जनवरी में वह एक साल के लिए न्यूयार्क जा रहा है। उसे पापा के क्लब ने स्पॉन्सर किया है स्पेशल ट्रेनिंग के लिए। कमरे में उसके आने से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हमें बेशक एक-दूसरे की बात समझने में या अपनी बात समझाने में काफी दिक्कत हो रही थी, लेकिन फिर भी हम दोनों का अकेलापन कट रहा था। मेरा अकेलापन तो खैर दो-चार दिन का था। वह खुद को अभिव्यक्त करने के लिए कितना परेशान रहता होगा। तभी उसने घडी देखी।

बताया-उसके टयूटर के आने का वक्त हो गया हैउसने अपनी चीजें सहेजीं और फिर मिलने का वादा करके चला गयावह अपने पीछे कई सवाल छोड ग़या हैकितना अकेलापन महसूस करता होगा टीपूक्या रितु उससे उसी तरह लड-झगड क़र लाड-प्यार जताती होगी जिस तरह सामान्य भाई-बहन करते हैंक्या आंटी अपने क्लब और पार्टियों से फुर्सत निकालकर इसके सिर पर हाथ फेरने या होमवर्क करवाने का टाइम निकाल पाती होंगीक्या इसके उस तरह के दोस्त होंगे जो इसे अपने खेलों, अपनी दिनचर्या में खुशी-खुशी शामिल करते होंगेक्या उदिता और टयूटर के अलावा भी कोई उससे बात करता होगामैं तो यहां दो दिनों के अकेलेपन से ही टूट रहा हूं, बेचारा टीपू तो कब से अकेला हैमुझे नहीं लगा कि वह अपनी दिनचर्या में इतना खो जाता हो कि उसे किसी साथी की जरूरत ही न होती होउसने अपनी एक अलग दुनिया बनायी तो होगी लेकिन उसका कितना दिल करता होगा कि कोई उसकी अकेली दुनिया में आएदेर तक उसके ख्यालों में खोया रहा

इन्टरव्यू बहुत अच्छा हो गया हैमैं चुन लिया गया हूं और मुझे मेरे अनुरोध पर दिल्ली हैडक्वार्टर दिया गया है दिल्ली, पंजाब और हरियाणा कवर करना होगा अपॉइन्टमेंट लैटर दस दिनों में भेज दिया जाएगा तुरन्त ज्वाइन करना है और पन्द्रह दिन की ट्रेनिंग के लिए फिर बम्बई आना होगामेरी खुशी का ठिकाना नहीं हैमेरे संघर्ष खत्म हो रहे हैं मनपसन्द नौकरी मिल गयी हैअच्छी पोस्ट, बडी क़ंपनी, अच्छा वेतन, और टूरिंग जॉबमैं इतना उत्साहित हूं कि जी कर रहा है कि किसी भी व्यक्ति को रोककर उसे अपने सेलेक्शन के बारे में बताऊं। बाऊजी को तुरन्त तार दूं, लेकिन तार तो कल ही पहुंच पाएगाफोन कर दूं, पडौस के सचदेवा के घर, लेकिन उन लोगों से तो आजकल ठनी हुई हैकहीं मेरा नाम सुनकर ही फोन रख दिया तो मेरे तीस-चालीस रूपयों का खून हो जाएगामैं तो इसी वक्त और यहीं अपनी खुशी बांटना चाहता हूं। कितनी अजीब बात है, असीम दुख के क्षण मैंने तनहा काटे हैं और कभी किसी को अपने दुख का हमराज नहीं बनाया हैआज मैं अपनी खुशी के क्षणों में भी अकेला हूं। कोई हमराज है ही नहीं यहां। हालांकि खुशी बांटने के लिए कब से तरस रहा हूं।

घर पर तार डाला मृदुभा को सांकेतिक भाषा में कार्ड डालाथोडी देर मैरीन ड्राइव पर टहलता रहामन बहुत हलका हो गया है समुद्र ज्वार पर हैलगा, मानो वह भी मेरी खुशी में शामिल है और लहरों के हाथ बढाकर मुझे बधाई दे रहा हैबहुत खूबसूरत है शहर का यह हिस्सावापिस आने का मन ही नहीं हैघर लौटते हुए शाम हो गई हैएक मन हुआ कि मिठाई का एक डिब्बा ही ले लूं अंकल वगैरह के लिएलेकिन टाल गयामुझे पता है मिठाई का भी वही हश्र होना है जो पकवानों और कार्डिगन का हुआ हैमुझे और फजीहत नहीं करानी अपनी, न ही मूड खराब करना है

घर पर सिर्फ टीपू और रूबी हैंमैंने टीपू को खबर सुनायी हैवह तपाक से मेरे गले मिला हैमैंने खुशी से उसका गाल चूम लिया है और उसके बाल बिखरा दिए हैंवह बहुत खुश हो गया हैमुझे अच्छा लगा है कि घर पर सिर्फ टीपू मिला हैआंटी वगैरह को तो मैं बताता ही नहींरूबी ने चाय के लिए पूछा, लेकिन टीपू ने मना कर दिया है
- आज की शाम हम सेलीब्रेट करेंगे
खाना भी बाहर खायेंगे, और उसने मुझे हाथ-मुंह धोने का भी मौका नहीं दिया हैघसीट कर बाहर ले आया है हल्की-हल्की बूंदा-बांदी हो रही है और आज बरसात में भीगना अच्छा लग रहा हैपर शायद टीपू को यहां की बरसात में भीगने में कोई दिलचस्पी नहीं हैउसने एक टैक्सी रूकवायी है और कोलाबा की तरफ चलने का इशारा किया हैमैं परसों इस तरफ आया था लेकिन तब मूड खराब होने के कारण कुछ भी एन्जॉय नहीं कर पाया थाआज कोलाबा में घूमना चाहता हूं, पर टीपू पता नहीं कहां लिए जा रहा हैउसने दो-एक बार टैक्सी को दायें-बायें मुडने का इशारा किया है टैक्सी ताज होटल के पोर्च में आकर रूकी हैअब तक ताज होटल और गेटवे को फिल्मों में ही देखा थाकिसी फाइव स्टार होटल में जाने का यह पहला मौका हैमैं मेरठ के एयर कण्डीशण्ड होटलों में भी दो-एक बार ही कॉफी पीने ही जा पाया थामैंने टैक्सी का बिल देने की बडी क़ोशिश की परन्तु टीपू ने दिया और चेंज लिए बिना मुझे घसीट कर अन्दर ले चलामैंने जेब पर बाहर से ही हथेली के स्पर्श से महसूस कि किया पैसे सुरक्षित हैं। हालांकि मुझे यहां के दामों के बारे में कोई जानकारी नहीं है फिर भी मैंने मन ही मन हिसाब लगा लिया है, सौ-डेढ सौ रूपए तक तो खर्च होंगे ही

अंदर आते समय मेरा मन मध्यमवर्गीय दब्बूपन की वजह से डर रहा है, लेकिन टीपू की चाल में ऐसी कोई बात नहीं हैवह लापरवाही के अन्दाज में मेरी बांह में बांह डाले चल रहा हैमेरा सारा ध्यान आसपास की रौनक और शानोशौकत पर लगा हैमेरी निगाहों में चकित भाव है जिसे मैं छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा हूं।

हम पहली मंजिल पर स्थित रेस्तरां में पहुंचे। इत्तिफाक से ठीक समुद्र वाली खिडक़ी के पास की एक मेज खाली मिल गयी समुद्र अपना असीम विस्तार लिए हमारे सामने हैदूर खडे बडे-बडे ज़हाजों की बत्तियां बहुत अच्छी लग रही हैं छोटी-बडी क़िश्तियां ंची लहरों पर इतरा रही हैइससे पहले कि मैं मीनू पर निगाह डालूं, टीपू ने दो बीयर का आर्डर दे दिया हैहमारी निगाहें मिलती हैं तो दोनों मुस्करा देते हैंटीपू मुझसे मेरे इन्टरव्यू के बारे में पूछता हैमैं बतलाता हूं कि किस तरह सत्ताइस लडक़ों में से पांच को इन्टरव्यू के बाद भी रूकने के लिए कहा गया थाउन पांच में मैं भी था उन्हें कुल तीन लडक़े लेने थेबाद में इन्फॉरमली बातचीत के लिए बुलाया गया था और तभी मुझे बता दिया गया था कि मैं चुन लिया गया हूं। बीयर आ गयी हैसाथ में भुनी हुई मूंगफली और सलाद सर्विस बहुत अच्छी है और वेटर वगैरह बहुत नम्र

हम धीरे-धीरे सिप करने लगे हैंमैं टीपू से उसके दोस्तों, उसके परिवार वालों के व्यवहार के बारे में पूछना चाहता हूं परिवार वालों का नाम सुनते ही उसने मुंह बिचकाया हैमुझे पहले ही आशंका थी कि उसे बहुत अच्छा ट्रीटमेंट नहीं मिलतावह माइमिंग करके बताता रहा कि किस तरह पापा से बात किए हुए उसे कई दिन बीत जाते हैं, सिर्फ हैलो, हाय से आगे वे कभी बात नहीं करतेअव्वल तो वे घर पर होते ही नहींक्लब, पार्टियां, बिजनेस ट्रिप्स वगैरह और जब घर पर होते हैं तो या तो अपने बैडरूम में बैठे रहते हैं और बिजनेस के फोन वगैरह करते रहते हैं या शाम के वक्त अ