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कृष्ण तुम जल्दी आओ

समय नहीं है,कृष्ण! तुम जल्दी आओ ।
भूल चुका है र्अजुन,
गीता की वे सारी बातें ।
नहीं कांपते हैं, अब हाथ, भाई के ,
भाई पर चल जाने में
बस जन्म प्रारब्ध हे,
और मृत्यु पूर्णाविराम
आत्मा शरीरी कपड़े नहीं बदलती है अब।
जन्म से मृत्यु तक सीमित हो गया है, जीवन अथक,
एक ही उम्र में जिसे,करना चाह रहे हैं,
सभी के सभी,सार्थक
भाई को भाई के हाथों मर जाने से रोको।
उठो !
समय नहीं है, कृष्ण ! तुम जल्दी आओ
असंभव नहीं है,
इटंरनेट के एक बटन से बस,
हो सकता है,
द्रौपदी का चीरहरण
कहीं देर न हो जाये,
आओ,
पहले पाडवों के आपसी मतभेद मिटाओ,
दुशासन को मारो,
और जल्दी से कोई ऐसा चक्र चलाओ कि,
हम सब को एक ही पल में,
हाँ ! बस एक ही पल में,
कलियुग से द्वापर में पहुंचाओ।
समय नहीं है, कृष्ण! तुम जल्दी आओ।

डॉ अजय कुमार जैन



 

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