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कौन कहता है देश जागा है

जानवर भूल गये जंगलीपन
आदमी जंगलों को भागा है।
लोग तो सो रहे हैं सड़कों पर
आप कहते हैं देश जागा है।
कौन कहता है देश जागा है।

हद में गिरजे की बंध गया कोई
ले के किरपाण तन गया कोई।
आपके दिल में बसी है काशी
उनकी नज़रों में सिर्फ़ क़ाबा है।
कौन कहता है देश जागा है।
जिस्म पर मल के राख़ सपनों की
बन गये एकलव्य सन्यासी।
योग्यता मापती है सड़कों को
और भरत तख्.त पर बिराजा है।
कौन कहता है देश जागा है।
लोग क़तरा रहे हैं अपनों से
दिन पुराने हुए हैं सपनों से
एक आंधी चली है नफ़रत की
प्यार का टूट गया धागा है।
कौन कहता है देश जागा है।
 

- राकेश मोहन कौशिक   

 

 

जो न झुकते थे
(काश्मीर के विस्थापितों के प्रति)

जो न झुकते थे किसी के सामने रब के सिवा।
उन सरों को हर किसी के सामने झुकना पड़ा।

इक टपकते टेंट में दुनिया सिमट कर रह गयी
स्वर्ग अपना छोड़ रातो रात भाग आना पड़ा।

धूप मैदानों की गोरे रंग को झुलसा गयी
नन्हे बच्चों को खुले आकाश में सोना पड़ा।

बांटते थे जो खुले दिल से ज़रूरतमंद को
खुद सवाली बन के उन को हाथ फैलाना पड़ा।

दर्द खोने का नहीं पर ग़म है तो इस बात का
ज़ख्म हर अपना हमें सौ बार दिखलाना पड़ा।

स्वप्न तुलमुल1 और गणपतयार2 बन कर रह गये
शारिका3 के भक्तों को मां से जुदा होना पड़ा।

ये सिला उनको मिला कहने का वंदे मातरम
गोलियां खानी पड़ीं और सूली पर चढ़ना पड़ा।

था ये उनका दोष करना प्यार हिंदुस्तान को
देश में अपने ही विस्थापित जिन्हें बनना पड़ा।

जो न झुकते थे किसी के सामने रब के सिवा।
उन सरों को हर किसी के सामने झुकना पड़ा।

शब्द सहायता
1 यहाँ खीरभवानी का प्रसिद्व तीर्थ है.
2 श्रीनगर का प्रसिद्व गणेश मंदिर यहाँ स्थित है.
3 श्रीनगर में हारी परबत के पास स्थित देवी का मंदिर.
 

- राकेश मोहन कौशिक   

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