मुखपृष्ठ  |  कहानीकविता | कार्टून कार्यशालाकैशोर्यचित्र-लेख |  दृष्टिकोणनृत्यनिबन्धदेस-परदेसपरिवार | फीचर | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल धर्मरसोईलेखकव्यक्तित्वव्यंग्यविविधा |  संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

   

 

 

तुम्हारी याद

आज फिर आई तुम्हारी याद
तुम फिर याद में आई —
आकर कौंध गई चौतरफ
समूचे ताल में!
रात भर होती रही बारिश
रह – रह कर हुमकता रहा आसमान
तुम्हारे होने का अहसास —
कहीं आस – पास
भीगती रही देहरी आंगन – द्वार
मन तिरता – डूबता रहा
तुम्हारी याद में!
मैं जो एक दिन
मैं जो एक दिन
तुम्हारी अधखिली मुस्कान पर रीझा‚
अपनों की बेहतरी और बचाव के लिये
उमड़ती आंखों का आवेग —
मैं रीझा तुम्हारी उजली उड़ान पर
जो बरसों पीछा करती रहीं
अपनों के बिखरते संसार का‚
तुम्हारी चमकती आंखों में
छलकता वह अपनापन
अपने ही भीतर कहीं
तुम्हारे होने का विस्मय
मैं रीझा तुम्हारी भीतरी चमक
और ऊर्जा के उनवान पर
जैसे कोई चांद पर मोहित होता है—
कोई चाहता है
नदी की लहरों को
बांध लेना बांहों में!

-नन्द भारद्वाज

तुम यकीन करोगी

तुम यकीन करोगी —
तुम्हारे साथ एक उम्र जी लेने की
कितनी अनमोल सौगातें रही हैं मेरे पास:
सुनहरी रेत के धोरों पर उगती भोर
लहलहाती फसलों पर रिमझिम बरसता मेह
कुछ नितान्त अलग – सी दीखती हरियाली के बीच
बरसाती नदियों की उद्दाम लहरें
और दरख्तों पर खिलतो इतने – इतने फूल
कोसों पसरे रेतीले टीबों में
खोये गांवों की उदास शामें —
सूनी हवेलियों के
बहुत अकेले खण्डहर‚
सूखे कुंए के खम्भों पर
प्यासे पंछियों का मौन
अकथ सम्वाद‚
कुलधरा – सी सूनी निर्जन बस्तियां
मन की उदासी को गहराते
कुछ ऐसे ही दुर्लभ दरसाव
हर पल धड़कती फ़क़त एक अभिलाषा :
जीवन के फिर किसी मोड़ पर
तुम्हारी आंखो और आग़ोश में
अपने को विस्मृत कर देने की चाह
और यही कुछ सोचते – सहेजते
मैं थके – पांव लौट आता हूँ
बीते बरसों की धुंधली स्मृतियों के बीच
गो कि कोई खास शिकवा नहीं है
अपने आप से —
फ़क़त कुछ उदासियां हैं अकेलेपन की!

-नन्द भारद्वाज
 

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

             

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | सृजन साहित्य कोष |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

HomeBoloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2015 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manishakuls@gmail.com