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लद्दू घोडे.
अछोर समय को लादे अपनी पीठ
पर उनके गले में बंधी घंटियां जिरह कर रही हैं आपस में इतिहास में कहां खडे. हैं लद्दू घोडे.
लद्दू घोडे. अपनी पीठ के जख्म पर बैठी मक्खियों को भगाने के लिए पूरी पीठ बरकाते हैं
जिन पीठों को देख फिसल जाती हैं आंखें जिनमें बैठ मृगया के लिए निकलते हैं राजपुरुष उन्हीं पीठों का वरण किया है इतिहास ने
लद्दू घोडे. मंथर गति से चलते रहे युगों पीठ पर लादे स्तूप शिलालेख मूर्तियां गुंबद उन पर लदकर आया पूरा गांधार उन पर लदकर गई पूरी दिल्ली
अस्तबलों में कहां थी उनकी जगह पता नहीं पर वे यात्रा के पडावों और युध्द शिविरों में सम्राटों से दो दिन पहले मौजूद थे
अपने सैनिकों के लिये लिए हुए रसद और जीवन रक्षक औषधियां वे अंत तक मौजूद थे
पर कहीं नहीं थे वे इतिहास में जबकि किसी भी स्वर्णयुग की कल्पना बिना जख्मी पीठों के संभव नहीं
गले में लटकाये चने की थैली और पीठ पर सोना-चांदी लादे बीच यात्रा में किसी मोड. पर चुक गए लद्दू घोडे. इतिहास में दर्ज थे कूच करने के आदेश
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