मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

You can search the entire site of HindiNest.com and also pages from the Web

Google
 

मां 

पिता पेड. हैं
इम शाखाएं हैं उनकी
मां  छाल की तरह चिपकी हुई है
पूरे पेड. पर

जब भी चली है कुल्हाडी
पेड. या उसकी शाखाओं पर
मां ही गिरी है सबसे पहले
टुकड
­­टुकड हो कर

 

देवता 

पहला पत्थर
आदमी की उदरपूर्ति में उठा
दूसरा पत्थर
आदमी द्वारा आदमी के लिए उठा
तीसरे पत्थर ने उठने से इन्कार कर दिया
आदमी ने उसे
देवता बना दिया

 

 

 


हरीश पाण्डे
अप्रेल 29,2008

Advertise Your Site             Advertise Your Site
 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2008 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com