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रिश्तों पर दीवारें
टूटी माला बिखरे मनके,
झुलस गये सब सपने। अंगुली पकड़ कर पांव चलाया, घर के अंगनारे में, यौवन लेकर सम्मुख आया, वह अब बटवारे में। उठा नाम बटवारे का तो, सब कुछ लगा है बटने॥ टूटी माला बिखरे मनके, झुलस गये सब सपने। रिश्तों की अब बूढ़ी आंखें, देख-देख पथरायीं, आशाओं के महल की सांसें, चलने से घबरायीं। कल का नन्हा हाथ गाल पर, लगा तमाचा कसने॥ टूटी माला बिखरे मनके, झुलस गये सब सपने। दीवारों पर चिपके रिश्ते, रिश्तों पर दीवारें, घर आंगन सब हुए पराये, किसको आज पुकारें। रिश्तों की मैली-सी चादर, चली सरक कर हटने॥ टूटी माला बिखरे मनके, झुलस गये सब सपने। हर घर में बस यही समस्या, चौखट पार खड़ी है, जिसको छू-कर देखा 'रत्नम्' विपदा वहीं बड़ी है। हर रिश्तों में पड़ी दरारें, लगा कलेजा पफटने॥ टूटी माला बिखरे मनके, झुलस गये सब सपने।
मनोहर
लाल
रत्नम्
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