मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

You can search the entire site of HindiNest.com and also pages from the Web

Google
 

कितना मुश्किल है

धर्म की लादी ढोते हुए भी,

हिन्दू, मुस्लिम या कि सिक्ख,

जैन, बौध्द या क्रिस्तान

होते हुए भी                          

कितना मुश्किल है धार्मिक होना !

जैसे कोई शिल्पी

गढ़ता रहे शब्द सुन्दर

या रचता रहे छन्द टकसाली,

पर शब्द या छन्द की

रचना के बाद भी

कितना मुश्किल है कवि होना !

धर्म या कविता

कहां है विधान में !

अभिधान या परिधान में !!

जैसे बहुत मुश्किल है

फूल का पराग में,

खुशबू में बदलना,

वैसे ही बहुत मुश्किल है

विचार की धर्म में गति

और भाव की कविता में परिणति।


 

डॉ. राम निवास मानव
 मई 27, 2008

Advertise Your Site             Advertise Your Site
 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2008 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com