हसीन सपना
होठो पर मुस्कान
आंखोे मे एक हसीन सपना
मिल गया है आज हमे जिसे
हम कह सकते है अपना

दुनिया है आज अजनबी सी
आसमां छू रहै है हम
उड़ रहे है पंछी बन
अब धरा पर नही है कदम

जीने के खयाल से
सुकून मिल्ता है इतना
सोचती हूं उन से मिलने का एहसास
जाने हसीन होगा कितना

यूं लगता है जन्मों से बुने
सपने आज सच हो गए
जिन के लिए बने थे हम
आज उनके हो गए

बिजल द्विवेदी
 

भारत माता
मां आपको हमारा सादर प्रणाम
आज हम मनाएंगे खुशी आपके नाम
याद करेंगे हम गौरव से
आपके महान बच्चों के काम।
जिन्होंने दिलाए थे हमें खुशियों के
वो पैगाम
जिसको लेकर चलेंगे हम
अपने सीनों में थाम
सुना देंगे पड़ोसियों को वही पैगाम
प्यार से और शांति से सुबह हो या शाम
पर सुरक्षा करेंगे उसकी देकर अपनी जान
दुनियां देखती रहेगी भारत देश महान

राममूर्ति स्वामीनाथन  

समय
कतारों की यह लम्बी ज़िन्दगी
मन्ज़िल का नहीं कुछ पता
की तो थी तेरी बंदगी
बता फिर क्या मेरी खता
मरू की बालू में अब
मरीचीका नज़र नहीं आती
झूठा सही चश्मा ही नहीं जब
सूनी डगर कट नहीं पाती
लम्हों के आकाल में समय बेचारा
बेकसूर मारा गया
"कल" से निकला जनाज़ा उसका
"आज" भी "कल" पर टल गया

शरद पटेल