तरंगों की तल्खियां

तितली स्वभाव से ही तितली की भांति चंचल थी । छरहरा बदन, गौर वर्ण, तीखे नाक नक्श , कोई भी नजर भर देखले तो उसकी खूबसुरती की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकता । उसकी कल्पना में तितली के ही पंख थे और आंखों में सपनों का महल । अभी कल तक उसके जीवन में वह महक नहीं थी जो आज अचानक आगई । आज उसने रंगोली में प्रथम पुरस्कार् जीत लिया है जो होली के अवसर पर होने वाले आयोजनों  में अक्सर  होता है । अब उसे महसूस हो रहा है कि वह जो जीवन जी रही है वह असली नहीं है । शायद  परमात्मा ने उसे कुछ और ही करने के लिए धरती पर भेजा है । उसने ब्युटीशियन का कोर्स प्रारंभ कर दिया ।

अब उसे भारतीय संस्कारों, परिवेश और  जीवन सबमें घुटन का अनुभव होने लगा था । आज तितली की तरंगें सात सागर पार जाकर आकाश में कुलांचे भरने के लिए बेताब थी ।

केफ़िटेरिया में जार्ज से उसकी पह्ली मुलाकात हुई । उसे लगा कि यह नवयुवक उसकी योजना को मूर्त रूप दे सकता है । मेलजोल की यह् प्रगाढता हंसी मजाक से होते हुए सपनों की तरफ़ ढलने लगी थी ।  

कोल्ड कोफ़ी गटकाते हुए जार्ज ने उसके नाम और रूप की प्रशंसा की । वह बोला-  तू तितली है तो अपने स्वभाव के अनुसार कई फ़ूलों का रस चखना स्वाभाविक रूप से पसन्द् करती होगी । तितली भी कहां छोडने वाली थी, पलट कर बोली- तू भी तो फ़ूल ही है, फूल भी कहां एक  तितली से संतुष्ट होता है । उसे भी तॊ तितलियों के मेले में ही आनन्द आता है । दोनों ही ठहाका मार कर हंस पडे । बात सत्य भी थी । जार्ज  ही उसके स्वप्न की वह हिलोर थी जो उसे सात समन्दर पार ले जा सकती थी ।रोज रोज चोपाटी पर घुमना, मुवी देखना प्रारंभ हुआ और यह रंग गहराते गहराते एक दिन विवाह के स्वरूप में आगया । जार्ज और तितली ने कोर्ट में जाकर विवाह कर लिया । माता पिता ने सुना तो अपना सिर पीट लिया । लहर की तरंगों  को  उनकी अपेक्षा  भी क्या थी ? तितली को लगा कि सास ससुर की सेवा तो एक झटके में समाप्त हो गई ।

शादी करके जार्ज तितली को लंदन ले आया था । एक मजा मजाया ईन्जीनियर जो था । अच्छी सी नौकरी लग गई । तितली को लगता था कि उसके भाग्य खुल गये, अब उलके पास रूप यौवन के अलावा लखलूट दौलत भी है । उसकी लहरों में अब सागर की मस्ती है । वह  बडी से बडी बाधा को इन लहरों के बल पर तोड सकती है । उसे उन लोगों पर दया आने लगी जो छोटे छोटे घरोंदे पाकर जीवन को  धन्य मान लेते हैं ।

तितली को लगता कि सारी दुनिया उसी के घेरे के इर्द गिर्द् घुम रही है ।अब वह हर किसी  को अपनी समझदारी के किस्से सुनाना नहीं भूलती । लोगों को अपनी राय देना और अपनी राय पर चलने का आग्रह् करना उसका स्वभाव बन गया । पंचों की बात सर माथे पर लेकिन नाला तो यहीं गिरेगा की तर्ज पर तर्क करती । अब वह जार्ज को भी टोकने से नहीं डरती । उसे क्या पसन्द करना चाहिए, किस प्रकार का जीवन जीना चाहिए । उसने छोटा सा ब्युटीशियन का कोर्स करके भी  क्या हांसिल कर लिया और जार्ज एक इन्जीनियर की हेसीयत पाकर भी क्या  नहीं कर पाया ?

जार्ज उसकी लच्चर दलीलें सुनकर उबने लगा था । सच कहें तो अब वह तितली से कन्नी काटने लगा था । एक दिन् जार्ज को उठने में तनिक सी देर् हो गई । तितली की जुबान जो थी कैंची की तरह चलने लगी । वह बोली- जार्ज, सच कहुं तो तुमने परिवार की जिम्मेदारियों को कभी नहीं समझा । मैं मान सकती हूं कि इन दिनों तुम्हारी तबियत ठीक न हो । अगर ऐसा है तो डाक्टर को क्यों नहीं दिखा देते ? जार्ज को तितली का बारबार झल्लाना बहुत् बुरा लगता पर आदत मानकर मन मसोस लेता ।

धीरे धीरे तितली ने जाना कि अब वह गर्भवती हो गई है । वह दिन रात अपनी संतान का चेहरा खुली आंखों देखने लगी थी । पहला पहला अनुभव था । मातृत्व का एक नया आकाश उसे उडने को मिल रहा था । उसके एक बालक होगा, उसकी बर्थ डे पार्टी होगी, पास पडोसी, इष्ट मित्र सभी उपहार लेकर आएंगे , हेप्पी बर्थ डे टु यू गाएंगे । मैं और जार्ज सबका स्वागत करके कितने खुश होंगे । विलियम का जन्म हुआ ।

विलियम अब बडा हो रहा था । उसके कारण उसके ब्युटीशियन के धंधे पर भी विपरित प्रभाव पडने लगा था । विलियम को पालना घर में रख दिया गया था । धीरे धीरे बढती जिम्मेदारियों से तितली घबरा उठी । उसके घाव जार्ज के मन मस्तिष्क पर दिखने प्रारंभ हो गए । उसे साइट पर जाना था पर खाना अभी तैयार नहीं हुआ था । आज जार्ज झल्ला उठा, बोला- काश, तुम थोडा जल्दी उठ पाती तो मुझे कितनी सुविधा हो जाती । तितली के तन बदन में आग लग गई । वह झिडकते हुए बोली- हां, हां, इतनी जल्दी है तो खाना बनाने वाली क्यों नहीं रख लेते ? जार्ज नरम पडा, बोला-  फ़ास्ट फ़ुड के युग में कुछ भी नाश्ता बना लेने में समय कितना लगता है ? मैं अपना काम करता हूं, तुम्हारे काम में बराबर हाथ बंटाता हूं फ़िर् रोज की इस चखचख को क्या कहूं?  बात तू तू मैं मैं पड गई ।

जार्ज अब उदासीन रहने लगा था । इस चखचख से तलाक का विचार भी क्या गलत है ? तितली ने भी उसी रोबदाब से कहा- ले लीजिए, ले लीजिए, यहां भी कौनसी तुम्हारे ही नाम की चुनरी ओढ रखी है जिसे उतारी नहीं जा सकती । बात बढती चली गई । इस आपसी मन मुटाव और तलाक में विलियम का किसे ध्यान था ? उसका क्या कसूर था ? इसे सोचने का न मां के पास मस्तिष्क था और न पिता के पास जिगर । अब धमकी केवल धमकी नहीं थी । सचमुच दोनों ने तलाक ले लिया । विलियम पांच वर्ष का होगया था । उसे उसकी इच्छा के अनुरूप पिता के पास रहने की इजाजत मिल गई।

तितली अब कहां जावे ? भारतीय परिवेश तो  वह संपूर्णतया जला चुकी थी । अतः भारत लौटना नामुमकिन था । वह् सिडनी चली आई ।  

ढूंढने वाले के पास  काम  की कहां कमी रहती है फ़िर वह तो ब्युटीशियन थी । अपने काम से कुछ वक्त निकालकर रोज सायंकाल बोंडाई बीच पर आजाती और अपनी कल्पना में खोजाती । सागर जितना विराट है उतनी ही मस्त उसकी लहरें । लहरों का ज्वार भाटा ही जीवन का पर्याय है । आज उसके जीवन  की  लहरों में  सुनामी ने कहर सा बरपा दिया । अब उसका यौवन अर्थहीन नहीं ,उसका मातृत्व ,आकांक्षा,भूख प्यास और कल्पना की रंगीनी सबको सुनामी लीलगई है । बचा है शव सा देह, कराहते स्वप्न और टूटी फ़ूटी यादें ।

            उसे याद् आया । उसकी बहनें आज भी अपने परिवार में सुखी हैं । उषा अपने पति के साथ शिमला में है, उसकी बैंक में नौकरी है । आर्थिक उडान बहुत ऊंची नहीं तो कोई हर्ज नहीं पर उसके सपनों की ह्ड्डी तो चकनाचूर नहीं हुई । उसकी बडी बहन विशाखा का छोटा सा परिवार  है । दो बच्चे हैं, उदयपुर में छोटा सा व्यापार है । छोटी सी दुनियां में अपने छोटे बडे स्वप्नों के साथ मस्ती से झूम लेती है । अब उसे लगता था कि उसने बहुत ऊंची उडान भरकर कोई समझदारी नहीं दिखाई है ।

            उसे याद है डायलाव का वह किनारा, जहां हम तीनों बहनें घंटों तक बैठती, खूब बतियाती । कंकर फ़ेंककर तालाब में खूब लहरें उठाती और उनमें खोजाती । तालाब में लहरें अपेक्षा कृत छोटी होती हैं । पर उसमें झिलमिलाती चांदनी की ओढनी सदैव  सर पर ढकी रहती है । उसमें नाचती हुई चंद्र ज्योति का सुख  है पर मैने झील की लहरों में कब सुख माना ? सागर की मौजों में जिसे खोना है खोए, वहां सागर में अनुशासन कहां होगा ?

            उसका लाडला, विलियम, वह गोरा सा, गोल चेहरा, घने काले बाल, कनखियों की वह मासूमियत सब कुछ छीनकर सागर की मौजों ने उसे क्या दिया ? वह सिहर उठती, क्या बडे स्वप्न देखना जुर्म है ? जो एक थपेडे के साथ बिखर जाएं । क्या विलियम उसे भूल चुका होगा ?

            अब उसका जीवन प्रायश्चित का जीवन था । वह नित्य सोंचती, पछताती उसने उत्ताल तरंगों के साथ क्यों खेलना चाहा ? आज उन तरंगों की तल्खियों से वह जल रही है । काश, वह अपने सपने लौटा पाती ।

            आज भी सायंकाल नित्य की ही भांति बोंडाई बीच लौट आई थी । सागर की लहरें उसके मन मस्तिष्क को सहला रही थी । पांच वर्ष बाद उसने अचानक विलियम को रेती में घरोंदे बनाते हुए देख लिया । विलियम की आंखें भी उस ओर उठी । वह दौड पडा अपनी मम्मी से गले मिलने । तितली इतनी झूम उठी जितनी इससे पहले कभी नहीं झूमी थी । जार्ज भी शायद किसी काम के सिलसिले को लेकर सिडनी आया था । तितली ने बाहें पसार कर अपने भूतकाल को गले लगा लिया था । क्या अब वह  अपने भूतकाल को पुनः भविष्य काल में नहीं बदल सकती ? अब उस पर चाहे आसमान टूट पडे, पर अब वह इन तरंगों की तल्खियों से अपना जीवन बरबाद नहीं होने देगी ।

                                            -धनपत राय झा   

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