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अमेरिका विनाश की पृष्ठभूमि रच
कर समृद्धि हासिल करता रहा है

सर्कल्स रोबिंसन 

जब मैं बच्चा हुआ करता था, तब मैं अक्सर अपने दादा के कार्यालय का चक्कर लगाया करता था। मैं अपने दादा को अक्सर यह कहते सुना करता था कि युद्ध कारोबार के लिहाज से अच्छा होता है। तब मुझे यह अवधारणा समझ में नहीं आती थी, लेकिन अब मैं समझ चुका हूं कि वाकई अमेरिका विनाश की पृष्ठभूमि रच कर समृद्ध होने का जुगाड़ करता रहा है।

जब वियतनाम के खिलाफ अमेरिका ने जंग की शुरुआत की, तब मुझे अपने दादा की टिप्पणी का व्यावहारिक अर्थ समझ में आने लगा। मेरे दादा बिल्कुल सही थे। मैं यह समझ चुका हूं कि जब कभी अमेरिका किसी दूसरी धरती पर युद्ध लड़ता है तो उसकी कंपनियों की चांदी हो जाती है। बम, तोप, विमान, जहाज, शस्त्र, वर्दी, खाद्य उत्पाद, सामरिक उपकरण आदि बनाने वाली कंपनियों की व्यस्तता बढ़ जाती है। तब  युद्ध का यह पूरा धंधा अरबों डॉलर का हो जाता है। मेरा मानना है कि युद्ध का सबसे अधिक लाभ कॉरपोरेट जगत को होता है जिन्हें करोड़ों व अरबों डॉलर के ठेके मिलते हैं। अमेरिका इन दिनों ईरान के खिलाफ युद्ध की पृष्ठभूमि रचने में लगा है। अमेरिका की इस खतरनाक कूटनीतिक सरगर्मी के बावजूद डो जोंस स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक में इजाफा हुआ है। यह सूचकांक मार्च 2003 में इराक के खिलाफ युद्ध के आगाज के दौरान के संवेदी सूचकांक से 75 फीसदी अधिक है।  

जाहिर है युद्ध की संभावना से कुछ खास कंपनियां उत्साहित हैं। इराक की जनता यह महसूस करती है कि उन्हें सद्दाम से मुक्ति के नाम पर विनाश का झुनझुना थमाया गया वहीं कई अमेरिकी कंपनियों की रातोंरात चांदी हो गयी। अमेरिकी मीडिया में इन दिनों इराक में अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों के मारे जाने की खबरें छाई रहती हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि कॉरपोरेट जगत के लोग इराक के खिलाफ युद्ध से अर्जित डॉलर और सेंट गिनने में लगे हुए हैं। कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों में इराक में ठेके हासिल करने की होड़ लगी हुई है। इराक की सरजमीं पर अमेरिकी सैनिकों की वर्दी फटने, हेलीकॉप्टर गिरने, गोली खत्म होने आदि का मतलब है अमेरिकी कंपनियों की व्यस्तता में इजाफा। दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें से सीईओ का बेटा या बेटी या किसी अमेरिकी सांसद का बेटा इराक की सरजमीं पर नहीं लड़ रहा, लेकिन सबसे अधिक फायदे में वे ही हैं। अब ईरान को इराक के रास्ते पर धकेलने की कोशिश हो रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

 

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