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बालदिवस

आज बाल दिवस है‚ जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन। आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू " चाचा नेहरू" के नाम से ही लोकप्रिय रहे हैं‚ कहते हैं उन्हें बच्चे बेहद पसन्द थे‚ और उन्हें अपना जन्मदिन बालदिवस के रूप में मनाना अच्छा लगता था। उन्हें दो ही चीजें तहे दिल से पसन्द थीं एक नन्हे बच्चे और दूसरा लाल गुलाब। वे बच्चों को भी गुलाब का पर्याय माना करते थे।

उनके मन में मानवता मात्र के प्रति प्रेम था‚ समाज सेवा को वे अपना धर्म मानते थे और सत्य में उनका विश्वास था। दरअसल वे सत्य के खोजी थे। वे कहते थे कि सत्य ठहरता नहीं बल्कि वह विकास करता है। उनकी सत्य की दिशा में खोज अनुभव व ज्ञान विज्ञान पर आधारित थी।

नेहरू जी एक ऐसे नेता थे जो जनता के बहुत करीब रहे हैं। नेहरू जी शांति दूत बन कर विदेशों में गये। वे पूरे विश्व में शांति का प्रचार करते थे। वे कहते थे कि सभी देश एक दूसरे पर निर्भर हैं अतÁ सभी देशों को मिल जुल कर विकसित होना है। वे मानते थे कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे‚ जहां वे अच्छे राजनीतिज्ञ थे वे अच्छे लेखक भी थे। " विश्व इतिहास की एक झलक " तथा '' भारत एक खोज " के अतिरिक्त उन्होंने कुछ अन्य पुस्तकें भी लिखीं किन्तु यहां बच्चों में नैतिक बल व व्यक्तित्व के विकास के प्रति आंखे खोलने वाली उनकी एक और पुस्तक उल्लेखनीय है‚ जो जेल से अपनी बेटी इंदिरा प्रियदर्शिनी को लिखे पत्रों का संकलन है।

नेहरू जी ने अपने आकर्षक स्नेहिल व्यक्तित्व तथा प्रतिभा के बल पर न केवल भारत में बल्कि समूचे विश्व में स्नेह व सम्मान प्राप्त किया।नेहरू जी का व्यक्तित्व चुम्बकीय था। वे जन्मजात योद्धा थे। उन्होंने जातिभेद‚ रंग व वर्णभेद का जम कर विरोध किया। उन्होंने ब्रिटिशसाम्राज्यवाद को मिटाने में अहिंसा व गांधी जी का साथ दिया।

नेहरू के भारत का सपना भारतीय बच्चों को खुशहाल देखने का सपना था‚ जो कि भारत के विकास के साथ कुछ हद तक पूरा भी हुआ। किन्तु विडम्बना तो यह है कि आज भी भारत के गरीब तबके के बच्चे बाल श्रमिक होने की नियति को भोग रहे हैं। ये नन्हे नन्हें बच्चे भारतीय जनता तथा मीडिया को तभी याद आते हैं जब बाल दिवस आता है। वैसे इनके प्रति कोई कुछ नहीं करता। बच्चों के श्रमिक होने के एकदम खिलाफ थे नेहरू जी‚ पर भारतीय जनसंख्या के साथ साथ बालश्रमिकों की संख्या बढ़ी ही है घटी नहीं है‚ चाहे ये बच्चे घरों में नौकर हों‚ या ढाबे पर बर्तन साफ करते हों या चूना गारा ढोते हों। अनेकानेक सरकारी संस्थाएं तथा स्वयण्सेवी संस्थाएं इस दिशा में उल्लेखनीय काम कर रही हैं पर इस समस्या की जड़ में भारत के कई प्रदेशों में फैला अकाल व गरीबी है जिससे जूझना कठिन नहीं पर बहुत आसान भी नहीं है।

जवाहर लाल नेहरू जी ने भारत की नई पीढ़ियों का जो सपना देखा है उसे पूरा करने को पिछली कई पीढ़ियां लगी रही हैं तथा हमारी आगामी कई पीढ़ियों के जुटे रहने पर ही वह सपना पूरा होगा। इसके लिये देश की युवा पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व की उस निरन्तर ऊर्जा‚ जीवन्तता तथा पुरुषार्थ से प्रेरणा लेनी होगी। ताकि हम भारत को सक्षम व समर्थ राष्ट्रों के समकक्ष खड़ा पायें।

आज बाल दिवस पर बच्चों को ढेर सारी शुभकामनाएं।

– गरिमा
 

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