मुखपृष्ठ कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |   संस्मरण | साक्षात्कार | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
साक्षात्कार
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

   

 

 

अब कोई विकल्प शेष नहीं

क्या अब भी तर्क–कुतर्क की आवश्यकता बाकि है? क्या अब भी किसी विश्लेषण की संभावना शेष है? अब किसी संदेह की भी गुजांईश नहीं कि यह आतंकवादी हमले पाकिस्तान की शह से हो रहे हैं। अब तो ठोस कार्यवाहियों को लेकर किसी बहस मुबाहिसे को बन्द करें हम। क्या अब समय नहीं धैर्य‚ संयम‚ विवेक के सिद्धान्तों का जामा उतार कर इन कार्यवाहियों के जवाब में आतंकवाद का समूल नाश कर दिया जाए। इस गुरूवार को 'पोटो'  या के प्रति खिलाफत या ' कोफीन स्कैम' के खिलाफ जनप्रतिनिधियों के शोर सुनाई देने की जगह आतंकवादियों के हमले की गूंज सुनाई दे गई।

इस बार देश की सम्प्रभुता की प्रतीक भारतीय संसद को निशाना बनाया गया। चलते हुए सत्र के दौरान सारी सुरक्षा व्यवस्था को चकमा दे कर संसद क्षेत्र उपराष्ट्रपति‚ उपसभापति के आवागमन वाले मार्ग में सफलता पूर्वक घुसकर पाकिस्तान ज़िन्दाबाद के नारे लगाते आत्मघाती उग्रवादियों ने अपने काम को अंजाम देने में एक हद तक सफलता हासिल कर ही ली थी कि दिल्ली पुलिस‚ सी आर पी एफ के तथा सेना के जवानों ने स्थिति संभाल ली थी।

लोकतन्त्र का गौरव रखने वाली भारतीय संसद पर यह हमला निÁसंदेह एक खुली चुनौती है। अब तो सहिष्णुता और संयम तथा धैर्य के प्रतीक भारत को अपनी प्रतिक्रिया में वीरोचित आचरण का प्रदर्शन करना ही होगा। यही हमारी संस्कृति कहती है‚ कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैसे विवेकी और उदात्त नायक को भी एक सीमा के बाद अपनी विनयशीलता छोड़ हाथ में शर और चाप उठाना पड़ा था‚ अब भारत भी उसी सीमा पर खड़ा है जबकि पाकिस्तान के आतंक को हमने बहुत सह लिया है अब।

अब हमारी भारतीय सिद्धान्तवादिता कायरता का भ्रम देने लगी है। जब ग्यारह सितम्बर के कुछ ही समय बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ लड़ाई छेड़ कर अब तक तो तालिबानों को नेस्तनाबूद तक कर दिया है। तो भारत अब तक किस क्षण का इंतज़ार कर रहा है? क्या अब भी किसी और बड़े सफल आतंकवादी हमले का? माना इस हमले से भारत के प््राधानमंत्री‚ मंत्रियों‚ सांसदों‚ नेताओं में से किसी का भी बाल बांका नहीं हुआ ( भले ही छह सुरक्षा कर्मी और एकाध अन्य कर्मी मर भी गये तो क्या!!!!) किन्तु क्या यह भारतीय संसद की अस्मिता का हनन नहीं था जो कि आजा.दी के बाद पहली बार हुआ है। यहां तक कि पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहुँच जम्मू की विधान सभा‚ दिल्ली के लाल किले के बाद अब संसद तक हो गई है। और हमारी सरकार के नेता और मंत्री तथा विपक्ष के नेता अब भी जवाबतलब या जवाबदेहियों‚ सरकार की गलतियों‚ घोटालों की बहस में उलझे हैं। न पक्ष‚ ना विपक्ष‚ विवश‚ क्षुब्ध और आहत जनता को कोई विश्वसनीय नहीं नज़र आता। उलझ कर रह गई है भारतीय जनता और उसने अपना भविष्य नियति के हाथों सौंप दिया है।

प्रधानमंत्री ने इस हमले की प्रतिक्रिया में 'आर पार की अंतिम लड़ाई का संकल्प' अभिव्यक्त तो किया है किन्तु क्या वे अपने इन शब्दों के प्रति सच में गंभीर हैं?

 

– मनीषा कुलश्रेष्ठ

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

             

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | साक्षात्कार | सृजन साहित्य कोष |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

HomeBoloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2016 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manishakuls@gmail.com