भारत :
पुरूषों की सौन्दर्य में बढती प्रवृति
विमेन्स
फीचर सर्विस
नई
दिल्ली (विमेन्स फीचर सर्विस) - यदि
'सुन्दर व सुरूप',
पुरूषों की सौन्दर्य क्रीम, के
विज्ञापन पर आप उपहास करें, और बौलीवुड के महानायक
शाहरूख खान के गुलाब की पंखुडियों से भरे स्नान कुण्ड में डूबे प्रतिरूप पर
आश्चर्य करें, तब सम्भव है कि आपको आज के समय में
शहरी युवकों में आए बदलाव का आभास नहीं है।
शहरी
युवकों के महिलाओं के पारम्परिक सौन्दर्य कक्ष व सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री के
एकछत्र किले को हथियाने के साथ आज का समय निसंदेह बदल रहा है। के एस ए
टेक्नोपैक, नई
दिल्ली आधारित फुटकर सलाहकार फर्म, के हाल में किए
गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत के शहरी युवकों में 70
प्रति शत सौन्दर्यालर्यों में महीने में कम से कम एक बार,
मात्र बाल कटाने नहीं वरन अन्य सेवाओं के लिए,
जाते हैं। सौन्दर्यालय आजकल बालों की सजावट,
मुंह
के सौन्दर्योपचार व त्वचा-उठाव उपचार सहित कई अन्य सेवाएं उनको अच्छे दिखने व
महसूस करने के लिए प्रदान करते हैं।
महिलाएं अभी भी कांच की दिवारों तक सीमित रहने का विरोध ही कर रही हैं लेकिन
पुरूषों ने इस सौंदर्य अवरोध को तोड दिया है। राजेश पाण्डे,
काया स्किन क्लीनिक,
उच्च-उदेश्य सौंदर्य सैलून
श्रृंखला,
मेरिको द्वारा देश भर में स्थापित,
के सी ई ओ, कहते हैं:
''हमारे मौजूदा खरीदारों में 21प्रति
शत पुरूष हैं। यह संख्या पिछले वर्षों में तिगुनी बढ गई है।''
महानगरीय-कामुक पुरूषों के आगमन के साथ साथ खर्च करने की क्षमता में वृध्दि
ने पुरूष को यह खुले रूप से यह स्वीकार्य बना दिया कि वह सौंदर्यालय जाना
पसन्द करता है,
और वह उन उत्पादों, जिन्हें दसियों
सालों पहिले प्रयोग करने पर भोंहें तन जाती थी,
के प्रयोग से हिचकिचाते नहीं। अब यह स्वीकार्य है कि एक
20 साल का युवक प्रति माह रू. 2,000/-(यू
एस+1त्ररू40) अपने निजी
कौमार्य-वृध्दि पर खर्च करता है।
''मैंने
अपनी दाढी की सुसज्जा के लिए सौंदर्यालय जाना आरम्भ किया और अब अन्य सेवाएं
जैसे नख प्रसाधन व पद प्रसाधन और यहां तक कि मुह के सौन्दर्योपचार के लिए
नियमित रूप'
से
सौंदर्यालय जाता हूँ। यह सब करने का कारण यह है कि इसके बाद मैं अच्छा अनुभव
करता हूँ और इस से मेरा आत्म-विश्वास बढता है,''
गुरविन्दर सोढी,
36,
श्वेत सामग्री कम्पनी के वरिष्ट कार्याधिकारी कहते हैं।
पुरूषों
व महिलाओं के अपने त्वचा-सावधानी सम्बधित सोच के बारे में अधिक प्रयोगशील व
विचारशील होने के कारण,
सौंदर्य अब भारत में बडा
व्यवसाय
है। बढती मांग की पूर्ति के लिए पुरूषों की अनेक सौंदर्य प्रसाधन सामग्री अब
बाजार में आने लगी हैं। इस प्रवृति के आकलन के लिए पहली कम्पनी इमामी है,
जिसकी 'सुन्दर व सुरूप'
इस श्रेणी में एक सर्वोत्तम बिकाऊ उत्पाद है। इस साल मई
में, नीबिया ने भी भारत में पुरूषों के लिए उत्पाद
निकाले। काया के अनुसार, पुरूषों
के निजी सौंदर्य प्रसाधन सामग्री
वर्ग
का
अनुमान 500
करोड रूपये से 800 करोड रूपए
है।
''हाल
में किए गए कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार,
पुरूष आइने के सामने औशतन
20
मिनट तक खडे
रहते हैं महिलाओं के
18
मिनट की
तुलना में। यूरोपीय पुरातन
'नियनडरथल'
रूप
अब नहीं है,
अब
पुरूष उदारता से अपने निजी कौमार्य-वृध्दि पर व्यय करते हैं। सुन्दर दिखना अब
केवल महिलाओं का अधिकार नहीं है। सबसे अच्छा दिखने से व्यक्ति का
आत्म-विश्वास बढता है,
जोकि
आज के पतिस्पर्धात्मक संसार में बहुत महत्वपूर्ण है। जैसे जैसे यह प्रवृति
बढती जा रही है,
हमें
पूर्ण विश्वास है कि अधिकाधिक पुरूष अपनी विशिष्ट बस्तुएं जैसे त्वचा क्रीम,
हाइड्रेटिंग जेल,
बालों का जेल,
बाल
सजावट,
विशिष्ट
त्वचा रखरखाव उत्पाद,
इत्यादि खरीदेंगे,''
सुदर्शन सिंह,
नीविया इंडिया के ब्राण्ड प्रबन्धक,
कहते
हैं।
विशाल
व्यय
योग्य आय भी बदलाव का एक घटक है। इसके साथ ही बदलती जीवन शैली,
अधिक उत्पाद बिकल्प व उपग्रह टी. वी. का प्रभाव,
घटक हैं जिन्होंने इस बदलाव को लाने में सहयोग दिया। इसके
अलावा बढती विदेश यात्राओं ने भी अन्तर्राष्ट्रीय रूझान से अवगत कराया।
इन्हीं घटकों ने भारतीय महिलाओं द्वारा अधिकाधिक सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग
को बढावा दिया।
डॉ.
हेमन्त चण्दुरकर,
पुणे आधारित जहांगीर चिकित्सालय में एक मनोवैज्ञानिक,
के अनुसार, ''पुरूषों में
मुक्ति के भाव हैं। पहिले उन्हें मर्दाना दिखना होता। यह एक क्रमिक प्रक्रिया
है, जो पहले गंदहर व हजामत बाद लगाए जाने वाले
औषधि से आरम्भ हुआ। मर्दानगी की संकल्पना को पुन: परिभाषित
किया जा रहा है। आज अच्छा दिखना एक आवश्यकता है। आज उच्च
वर्ग
व उच्च
मध्यम
वर्ग
के पुरूष
मुख के सौंदर्योपचार के लिए जाते हैं लेकिन धीरे धीरे इस से कम आय
वर्ग
में भी
यह फैलेगा।''
आज
पुरूषों की बढती संख्या कौमार्य वृध्दि,
विशेषकर असामयिक बुढापे से बचाव का महत्व महसूस करने लगी
है, आज की
व्यस्त
जीवन शैली,
जिसमें हर कार्य की पूर्णता की समय सीमा बंधी है,
काम का दबाव, कार्य करने का
गैर-मित्रवत वातावरण जैसे प्रदूषण व सूर्य की धूप से नुकसान,
को धन्यवाद। इसके अलावा, बहुत
सारे युवा कार्याधिकारी सोचते हैं कि अच्छा दिखना महत्वपूर्ण है
व्यवसायिक
ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए,
चाहे
साक्षातकार
के लिए या उच्च श्रेणी के ग्राहकों से मिलने क लिए। अच्छा दिखना बहुतों के
लिए केवल अच्छा महसूस करने के लिए नहीं है,
यह आज मूलभूत स्वास्थ्य-विज्ञान की जरूरत है।
''मैने
अपनी आंखों के पास झुरियां देखना आरम्भ किया और डर गया। जब पहली बार मैं
सौंदर्यालय गया तो मुझे अच्छा नहीं लगा लेकिन बाद में इतना अच्छा लगा कि अब
यह मेरी दिनचर्या का अंश है। अब मैं नियमत रूप से मुख के सौंदर्योपचार कराता
हूं,''
मोहित
अग्रवाल, 39,
एक
साफ्टवेयर इंजीनियर,
कहते
हैं।
निजी
देखभाल उत्पाद कम्पनियों का लक्ष्य
25
से 45 उम्र
वर्ग
के शहरी
पुरूष हैं। ''अभी,
विभिन्न
आयु
वर्ग
के पुरूष इन उत्पादों को ले रहे हैं,
लेकिन हमारे मूल उपभोक्ता 18
से 35 वर्ष के हैं,''
सिंह कहते हैं।
भले ही
यह बाजार अभी अपनी शैशवावस्था में है,
इसके आकार का अनुमान लगभग 750
करोड रूपये है और यह 200 प्रति शत की गति से बढ
रहा है। ''इस का मुख्य भाग अभी भी हजामत
वर्ग
का उत्पाद हैं। तथापि,
तेजी से बढ रहे उत्पाद जैसे त्वचा के क्रीम व बालों के
ज्येल इस
वर्ग
में अपना
स्थान बना रहे हैं। महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधनों की अपेक्षा,
यह नया व अल्प विकसित बाजार होने पर भी यह पुरूषों के
कौमार्य-वृध्दि
वर्ग
में नये
उत्पाद लाकर पुरूषों की कौमार्य वृध्दि जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयाप्त
काम करेगा''
सिंह कहते हैं।
मर्दानापन का पूर्व प्रचलित विचार अब बदलते समय के साथ निसंदेह बदल रहा है और
पुरूषत्व के बारे में रूढिवादिता
को निसंदेह ही बाहर फैक दिया गया है।
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गगनदीप कौर
(सौजन्य:विमेन्स
फीचर सर्विस)
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