उस क्षण,
न जाने क्यों ऐसी अनुभूति हुई
कि मेरा मन
एक विस्तृत भू-खण्ड है
मुझे भान ही कहां था
कि इस घास से भरे भू-खण्ड पर
कब से हजारों पक्षी
न जाने कैसे बीज चुग रहे है
अगर तुम न आते
और
इन अजाने- अदेखे
पक्षियों का झुण्ड शोर मचाकर
उड न गया होता
तो,
मैं अपने हरे भरे मन की
थाह कैसे पाती?

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