प्रिय बच्चों,

यह चिडिया स्पून बिल जिसे हिन्दी में चमचा या डाबिल कहते हैं, पालतू बतख से कुछ बडी होती है, लगभग 18 इंच ऊँची होती है। इसकी टाँगे और गर्दन लम्बी होती है और रंग एक दम सफेद होता है। इसकी चोंच बहुत ही सुस्पष्ट और काफी पीली चौडी तथा चपटी होती है। इसकी चोंच का सामने वाला सिरा एक स्पेटुला या चपटे चमचे के आकार का होता है। प्रजनन काल में इसके सर पर एक मोरछलनुमा पीली कलगी और गर्दन के आगे नीचे भाग में पीला लम्बा धब्बा उभर आता है।

यह चिडिया प्राय: अकेली या 15-20 के समूह में या सारसों या दलदल में रहने वाली अन्य चिडियों के साथ रहना पसंद करती है। यह चिडिया वैसे तो भारत में निवास करती है किन्तु शरद ॠतु में बाहर से भी अन्य स्पून बिल चिडियों के आ जाने से इनकी संख्या बढ ज़ाती है।

स्पून बिल दलदल, झीलों, नदियों के कीचड वाले किनारों पर रहते हैं। यह सुबह-शाम भोजन की तलाश में खूब मेहनत करता है और दोपहर में दलदली किनारों पर आराम कर लेता है। यह अपने भोजन के ठिकाने तक पहुँचने से पहले इकहरी तिरछी कतार में, अथवा अंग्रेजी के वी के आकार में धीरे-धीरे पंख लहराता उडता रहता है। उडते समय इसकी गर्दन और टाँगे तनी रहती हैं। ये बहुत ऊँचाई पर उडते हैं। इनका खाना मेंढक और उनके टेडपोल, घोंघें (मोलस्क जाति के जीव) और पानी के कीडे और कुछ मुलायम वनस्पति होते हैं। इनका पूरा झुंड उथले पानी में घुस जाता है ये अपनी गर्दन आगे और अधखुली चोंच टेढी क़रके, चोंच की नोक से कीचड उलट-पुलट करती इधर-उधर घूमते हैं। यह बोलने के नाम पर हल्का सा गुर्राते-से हैं। यह झील के आस-पास पनकौओं, सारसों, बगुलों के साथ पेड पर तिनकों का चबूतरा नुमा घोंसला बनाते हैं। ये एक बार में 3 अण्डे देते हैं जो रंग में मटमैले सफेद कहीं कहीं गहरे बारीक कत्थई धब्बे लिये होते हैं। इनका नीडन काल जुलाई से नवम्बर के बीच होता है।

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