मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | साक्षात्कार |सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 

उत्तर प्रदेश की तीन चौथाई धरोहरें
जोह रहीं संरक्षण की बाट

लखनऊ, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। अपने भीतर कितनी ही ऐतिहासिक घटनाओं को समेटे प्रदेश की तीन चौथाई धरोहरें आज भी संरक्षण की बाट जोह रही हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और प्रदेश का पुरातत्व निदेशालय सीमित संसाधनों के चलते एक चौथाई धरोहरों का संरक्षण कर पा रहा है। नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में ऐसे स्थल हैं जहां पर कहीं कब्जा है, कहीं अतिक्रमण तो कहीं भवन धराशायी होने की कगार पर हैं।

पुरातत्व के काम में लगी संस्थाओं के अनुसार प्रदेश में हजार के करीब ऐसे स्मारक और स्थल हैं जो ऐतिहासिक और पुरातात्विक नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और प्रदेश के सांस्कृतिक विभाग के अधीन पुरातत्व निदेशालय द्वारा लगभग 840 का संरक्षण हो पा रहा है। प्रदेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन तीन इकाइयों का कार्यक्षेत्र है।

लखनऊ मंडल द्वारा लगभग तीन सौ और इसके आगरा एवं पटना मंडल द्वारा चार सौ के करीब स्थलों एवं स्मारकों का संरक्षण हो पा रहा है। पुरातत्व निदेशालय द्वारा संरक्षण प्राप्त ऐसे स्थलों की संख्या 140 है।

लखनऊ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कुल 60 भवनों-स्थलों का संरक्षण कर रखा है, जिनमें इमामबाड़ा, रूमी गेट, आसफी मस्जिद, जामा मस्जिद नादान महल, बडा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा और रेजीडेंसी शामिल हैं। उधर प्रदेश पुरातत्व निदेशालय द्वारा लखनऊ में संरक्षित स्थलों-स्मारकों की संख्या 13 है।

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के घोषित संरक्षित स्मारकों को नष्ट करने, हटाने, खतरे में डालने या उसका दुरुपयोग करने वाले को कारावास जो तीन माह तक हो सकता है या जुर्माने जो पांच हजार तक हो सकेगा या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है। ज्यादातर स्मारक कब्जे और अतिक्रमण की शिकार हो गए हैं। कोठी बिबियापुर, आलमबाग गेट, सिंकदराबाद महल, दिलकुशा कोठी जैसी इमारतों में उचित देखरेख न हो पाने की वजह से मोटी दरारें पड़ गई हैं।

9 दिसम्बर 2007

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

 

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-डायरी | काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | साक्षात्कार | सृजन साहित्य कोष |
 

(c) HindiNest.com 1999-2020 All Rights Reserved.
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : hindinest@gmail.com