मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | साक्षात्कार | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 

तोता बाला ठाकुर की आत्मकथा
 

-२-
 

आओ

अगली ट्रेन पकड़ के

जितनी जल्दी हो सके चले आओ

कीचड़ में लथपथ

चढ़ी गंगा तैर

मेघों पर पाँव रख रख कर आ जाओ

आ जाओ देवदास की तरह

मैंने खोल रखे है द्वार

मैंने दे रखा है अपने स्वामी को विष

तुम आओ निडर

भूलना मत लाना बेल का फल

और संखिए की पुड़िया।




- -

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

 

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल डायरी | धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | साक्षात्कार | सृजन साहित्य कोष |
 

(c) HindiNest.com 1999-2021 All Rights Reserved.
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : hindinest@gmail.com