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ब्लू लवर्स : मार्क शागाल

कविताएं

तोता बाला ठाकुर की आत्मकथा - अम्बर

अपूरब गोस्वामी तुम आए घने वन में

यात्री को आता है जैसे अपनी छोड़ी हुई प्रेमिका का स्मरण

तुमने ही कहा था, स्मरण में मरण है

बताओ तो कौमार्य भंग करने में बाद

कोई करता है ऐसी बात अपनी स्त्री से
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हाँ लगता है चाँद - वसंत सकरगाए

कविताएं : तिथि
दानी

कविताएं -  देवेश पथ सारिया

 

फरवरी 2021
बसंत अंक

कहानियां

रॉन्ग नंबर  - महाश्वेता देवी

बिन रोई लड़की - सूर्यबाला

आख़िरी सिगरेट - जया जादवानी

फूल हरसिंगार के - गोपाल माथुर

एक हज़ार बरस की रात!!  - अनघ शर्मा



लवर्स इन ग्रीन : मार्क शागाल

ऐसी वैसी लड़की - गजेन्द्र एस. श्रोत्रिय

उनका हमारे शहर में आना - हीरा लाल नागर

ब्रेनफीवर - मनीषा कुलश्रेष्ठ

क़िला
- विनय कुमार

यह पत्र उस तक पहुँचा देना...
 - सुधा ओम ढींगरा

 

संपादकीय
प्रेम का रंग और मार्क शागाल

बर्थडे : मार्क शागाल

प्रेम का रंग कौनसा होता है? चित्रकारों से पूछा जाए? शागाल के चित्रों की गुनगुनाहट सुनें तो वे कहेंगे नीला। क्लिम्ट से पूछेंगे तो वे कहेंगे सुनहरा, मोद्ग्लियानी और अमृता शेरगिल के यहाँ यह जोगिया हो सकता है और पिकासो के यहाँ तो यह क्यूब्स में बंट कर जो चाहे हो जाए।
क्योंकि मैंने इस अंक के लिए रूसी मगर वैश्विक पेंटर शागाल की पेंटिंग्स चुनी हैं। तो उनकी सुनते हैं -- 'हम कलाकारों के जीवन में एक रंग ज़रूर होता है, जो एक कलाकार के पैलेट के माध्यम से जीवन और कला को मानीख़ेज़ बनाता है, वह है प्यार का रंग।'

मार्क शागाल से हिंदी पाठक का परिचय विश्वप्रसिद्ध भारतीय चित्रकार अखिलेश जी ने कराया था। वह अलग बात है कि हिंदी का लेखक और पाठक अन्य कलाओं में अपनी रुचि कितनी दिखाता है? खैर...मेरा ध्यान तभी शागाल पर गया जब अखिलेश ने मार्क शागाल की आत्मकथा का हिंदी अनुवाद किया था और वह पुस्तक 'आपबीती' शीर्षक से राजकमल से प्रकाशित हुई थी। यह यह किताब एक आम आत्मकथा नहीं है बल्कि एक चमकीले रंगो का कैलाइडोस्कोप है यादों का-- माता - पिता, बचपन, पड़ोस, दोस्त, प्रेमिका, प्रेमी युगल, गाएं, कुत्ते, घर, छत, गलियां जो-जो ऑबजेक्ट – सबजेक्ट उनके चित्रों में मिलते हैं, वे आत्मकथा में भी सजगता से मौजूद मिलते हैं। उनका जीना, रंगना और लिखना एक ही बात कहता है... प्यार, ज़िंदगी और जुनून।


गज़लें - अमित गोस्वामी

जानती हूँ प्यार कम-कम हो चला है - शार्दुला नोगजा

तुम और मैं  - गिरीश शास्त्री

हम मिलें - सुधीर कुमार सोनी

कविताएं
- पल्लवी शर्मा

सुनो प्रिये - रंजीता ‘फलक’

ललित निबंध

मैं तुम्हें प्यार करता हू - डा मुरलीधर चाँदनीवाला

एक असल प्रेम की कथा - सविता प्रथमेश

लव नोट्स

एक गोरैया की जगह खाली है - पल्लवी त्रिवेदी

दादी
- पल्लवी त्रिवेदी

मूमल
- पल्लवी त्रिवेदी
 

फ़्रांज काफ्का का पत्र फिलिस के नाम

19 नवम्बर 1912

प्रिय फिलिस,

मैं आज जो तुमसे मांग रहा हूँ ,वह तुम्हें मेरा पागलपन लग सकता है और मुझे तो बिलकुल ऐसा ही लगना चाहिए क्योंकि वो मैं ही तो हूँ जिसे तुम्हारे वो पत्र मिलते हैं । मुझे पता है कि यह तुम्हारे जैसे प्यार में डूबे हुए को एक बेहद कठिन इम्तिहान में डालना होगा|

तो फिर सुनो ,मुझे तुम हफ्ते में एक बार ही पत्र लिखा करो ताकि वह रविवार को मुझे मिले, क्योंकि रोजाना मुझमे इतनी हिम्मत नहीं कि तुम्हारे पत्रों से गुजर सकूँ । मैं सहन नहीं कर पाता उन्हे ! जानना चाहती हो तो सुनो ,जब मैं तुम्हारे किसी पत्र का जबाव देता हूँ ,एक बनावटी चुप्पी के साथ बिस्तर पर औंधे लेट जाता हूँ लेकिन मेरा दिल मेरे पूरे शरीर के साथ बहुत तेज़ी से धडक रहा होता है और मुझे तुम्हारे सिवा कुछ याद नहीं रहता । मुझे इसके सिवा कुछ याद नहीं रहता कि मैं तुम्हारा हूँ और इस भावना को व्यक्त करने के लिए इन शब्दों के अलावा मेरे पास कोई और तरीका नहीं , और ये शब्द इतने प्रभावी नहीं । यही कारण है की मैं ये नहीं जानना चाहता कि तुम क्या सोच रही हो ।
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ख़ते मुतवाज़ी - डॉ. लक्ष्मी शर्मा

अनजाने पते - प्रज्ञा पाण्डेय

राग मारवा - ममता सिंह

खुशी की ठंड - कुमार मुकुल

अपनी सी रंग दीन्हीं रे... ' - सपना सिंह

प्यार बसंत है -श्रद्धा थवाइत

जो बीत गया, वो बीत गया... - स्वरांगी साने

डिमी - अनामिका वर्मा

वेडिंग पार्टी ऑन द एफिल टॉवर : मार्क शागाल

" हिन्दीनेस्ट के बैनर तले हम ‘कहानी’ पर तीन दिन की (9 – 10- 11 अप्रेल 2021) वर्कशॉप करने जा रहे हैं। जैसा कि पहले भी घोषणा में लिखा था कि कहानी के हर स्वरूप पर विशेषज्ञों की एक टीम हमारे साथ होगी।"
- साहित्यिक कथा लेखन
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लवर्स एंड द हाफ़ मून : मार्क शागाल

शागाल के चित्रों में प्रेमी जोड़ों की प्रेमरत, नृत्यरत, चुंबनरत उड़ती हुई अलौकिक- सी छवियां और रहस्यात्मक नीलापन बहुधा पाया जाता है। 

मार्क शागाल उन चित्रकारों में से हैं जो कि प्रेम से भरे हैं। शागाल के चित्रों में हर चीज प्रेम के साथ शुरू और प्रेम ही के साथ खत्म होती है। यह उनके चित्रों में परिलक्षित होता है, उनके चित्रों के सब्जेक्ट में खुलता है। जैसा कि कहा जाता है कि शागाल के चित्र प्रेम, खुली आंखों के ख़्वाबों का लैंडस्केप हैं। हर चित्र मानो कोई कविता है, प्रेम की. विडम्बना की। उनका प्रेम इकहरा नहीं है। यह प्रेम जीवन के लिए, रंगों के लिए, लोगों के लिए, प्रकृति के लिए, यादों के लिए, सपनों के लिए, कला के लिए है। यही प्रेम आकाश के लिए और रात के लिए भी है तो उनके गांव के लिए. गांव के घरों के लिए, उनके माता-पिता और परिवार के साथ बीती हुई हर जीवंत घट्ना के लिए भी है। यही प्रेम उनके बनाए चित्रों का शिल्प है। वह रंगों से जुनून के तौर पर प्यार करते थे।
उनको अपनी पत्नी बेला और पेरिस के आकाश में उड़ते प्रेमियों को पेंट करना बहुत प्रिय था। उनकी कला में बिना किसी लेबल के अनूठा रोमांटिसिज़्म मिलता है। वे खुद कहा करते थे – “अगर मैं दिल से चित्र बनाता शुरु करता हूं तो वह हमेशा काम करता है अगर मैं दिमाग से काम लूँ तो काम नहीं बनता।“

जिस तरह उनके चित्र फंतासियों में रचे, मन की उड़ानों में सजे, अनुभूतियों से दमकते लगते हैं उन्हें किसी खास आर्ट मूवमेंट में रखना मुश्किल है। वह ना तो क्यूबिस्ट थे और ना ही सर्रियलिस्ट। भले ही उनके चित्रों में उड़ते प्रेमी और घर की छत के ऊपर गाय जैसे सर्रियलिस्ट दृश्यांकन करते रहे थे मगर उन्होंने अपने आप को किसी भी औपचारिक क्लासिफिकेशन और मेनिफेस्टो से दूर रखा था वह हमेशा कलाकारों में एकाकी और सपनों में डूबे हुए माने गए।
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