जो कभी नहीं बोलते
बोलते हैं अकसर सबसे ज़्यादा
जिसे तुम ख़ामोशी समझने की
भूल करते हो
वह जगह ढंकी है
शब्दों की लाशों से।
कविताएँ
जो नहीं बोलते
आज का विचार
ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।
आज का शब्द
ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।