तरह तरह के रिश्तों की
चट्टानों‚ पत्थरों और रेत से
बहकर
हर बार यह रिश्ता
और पारदर्शी
और चमकीला हुआ है
ज़रा भर कर देखो तो‚
अपनी अंजुरियों में
कैसा झिलमिलाता है
यह मानवीयता का रिश्ता !
तरह तरह के रिश्तों की
चट्टानों‚ पत्थरों और रेत से
बहकर
हर बार यह रिश्ता
और पारदर्शी
और चमकीला हुआ है
ज़रा भर कर देखो तो‚
अपनी अंजुरियों में
कैसा झिलमिलाता है
यह मानवीयता का रिश्ता !