तुम कौन हो ?
मन में ढेरों ज्वार लिये
मगर यों शान्त , एक महासागर
या
एक साधना कक्ष
जहॉं प्रविष्ट होते ही
मैं सारे विकारों से परिमुक्त ,
शान्त हो जाती हूँ।
तुम कौन हो ?
मन में ढेरों ज्वार लिये
मगर यों शान्त , एक महासागर
या
एक साधना कक्ष
जहॉं प्रविष्ट होते ही
मैं सारे विकारों से परिमुक्त ,
शान्त हो जाती हूँ।