मैं सिर्फ द्वार हूँ‚
जिनमें
तुम्हारी उम्मीदें और आशायें
प्रवेश पाती हैं
और गर्भधारण कर लौट आती हैं
और द्वारों का क्या
वो कभी भी बन्द किये जा सकते हैं।
कविताएँ
द्वार
आज का विचार
ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।
आज का शब्द
ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।