मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home |  Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

You can search the entire site of HindiNest.com and also pages from the Web

Google
 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

   

 

 

8 मार्च : अर्न्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

पुस्र्षसत्तात्मक समाज में स्वयंसिद्धाएं


अन्तत: गृहणी : घर संवारने वाली महिला द होम मेकर
एक समय था जब भारतीय महिला सुबह से लेकर रात तक घर का ढर्रा चलाने में संर्घष किया करती थी, खाना पकाना, बर्तन - कपड़े धोना, संतानों को जन्म देना और पालना। किन्तु आज परिस्थितियां बदल गयी हैं, आज स्त्री महज एक गृहणी नहीं आज वह घर संवारने सहेजने वाली जागरूक महिला है। वह पति की सहचरी है। वह घर की समस्त ज़िम्मेदारियों को गरिमा के साथ वहन करती है। न केवल घरेलू ज़िम्मेदारियां बल्कि वह बाहर के काम भी बखूबी करती है। वह वाहन चलाती है, बच्चों का स्कूल, बैंक का काम, सामाजिक काम सभी का निर्वाह अपने क्षमता के परे जाकर भी करती है।
स्त्री की एक प्रमुख विशेषता है जो पुस्र्ष में कम मिलती है, वह एक ही समय पर कामकाजी महिला और घर का कमाऊ सदस्य होने के साथ साथ माँ, पत्नी, बहू होने की भूमिका नटिनी की तरह कसी रस्सी पर चल कर बखूबी निभा जाती है।

हालांकि बहत कुछ हम पा चुके हैं, बहत सारी उपलब्धियां हमारे हाथों में हैं किन्तु अभी हमें मीलों आगे जाना है। आज भी हमारे ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अपने अस्तित्व की स्वतन्त्रता से नावाकिफ हैं। कन्या भ्रूण व बच्चियों की हत्या आज भी हमारे समाज में व्याप्त है।
आज पिछड़ी हुई और गरीब स्त्रियों के लिए हमें एकत्रित होकर संर्घष करना होगा। आज हमें यह वचन लेना चाहिये कि हम ज़रूरतमंद स्त्रियों को पढ़ाएं और किसी भी स्तर पर उनके लिए सहायक सिद्ध हों या उन्हें जागरूक बनने के लिए प्रेरित करें। ताकि वे अपना जीवन स्वास्थ रहकर, आत्मनिर्भर होकर गरिमापूर्ण तरीके से जी सकें। स्त्री की जागस्र्कता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। इस देश के विकास के लिये प्रत्येक महिला का जागस्र्क होना अति आवश्यक है। आओ हम सब मिल कर नारी सशक्तिकरण दिवस की सफलता में योगदान का हाथ बढ़ाएं।

मनीषा कुलश्रेष्ठ
संपादक, हिन्दीनेस्ट डॉट कॉम
मार्च 4, 2006



 

Top                                                                                                          मुख पृष्ठ

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

             

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | सृजन साहित्य कोष |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

HomeBoloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2015 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manishakuls@gmail.com