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लिपि के विकास से पूर्व भी मानव स्वयं की भावनाएं व कल्पनाएं भित्तिचित्रों के माध्यम से मूर्त करता रहा है चित्र सदैव शब्दों से अधिक मुखर होते हैं

चित्र दृश्यों में घटना, वातावरण और विषय की गहराई छिपी होती है किसी विषय को सुग्राही बनाने के लिये हमेशा चित्रों का सहारा लिया जाता है, चित्र हमारी कल्पनाशक्ति पर प्रतिबिम्बित होकर मानस पर गहरा असर डालते हैं उस पर शब्दों का साथ हो तो  मानो चित्रों को प्राण मिल गये हों जैसे

बहुत पुरानी नहीं तो बहुत नई भी नहीं है यह विधा पहले भित्ति पत्रिकाओं और पत्रिकाओं में बहुत प्रचलित रही है यह चित्र लेख विधा वेब पत्रिकाओं में दिन प्रतिदिन लोकप्रिय होती जा रही है हमारा भी यही प्रयास है कि इस स्तम्भ के माध्यम से हम आपको किसी भी विषय की गहराईयों तक ले जायें

अगर आप भी चित्रलेख में अपने चित्रों और शब्दों द्वारा किसी विषय को माध्यम बना कर इस स्तम्भ में भाग लेना चाहते हैं तो आपका स्वागत है

सम्पादक


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