नृत्य भी मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रसमय साधन है भारतीय नृत्य उतने ही विविध हैं जितनी हमारी संस्कृति शास्त्रीय नृत्य तो हैं ही लोक नृत्यों की तो कोई गणना ही नहीं जिस तरह भारत में कोस-कोस पर पानी और वाणी बदलती है वैसे ही नृत्य शैलियाँ भी विविध हैं

नृत्य हमारी संस्कृति का प्राचीन अंग है
उतना ही प्राचीन जितनी हमारी संस्कृति मोहनजोदडों और हडप्पा तक के पुरातात्कि प्रमाण है कि नृत्य भारत की प्राचीनतम संस्कृतियों से जुडा है। मोहनजोदडों की खुदाई में नृत्यमुद्रा में एक नर्तकी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। इसके अतिरिक्त भरत मुनि का नाटय शास्त्र  जो नाटय व नृत्य की दृष्टि से इतना व्यापक है कि प्रत्येक शास्त्रीय नृत्य में इस शास्त्र की परिभाषाएं आज भी प्रयुक्त होती हैं। नृत्य भारत की बेहद समृध्द और सुन्दर विरासत है। भारतीय नृत्यों में नर्तक के शरीर से ध्वनि निकलती है।