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कविताएं
शब्दशिल्पी हूँ मै-
मथुरा कलौनी

दिन के उजाले कम क्यों हो गये हैं
-मथुरा कलौनी
मेरी कहानी
-मथुरा कलौनी
हमारा संकल्
-मथुरा कलौनी

आतंकवाद पर
रूह से निकली कुछ बेआवाज आहें


साभार - ज्योतिष 
jyotish mising payeng

कुछ बेवा आवाजें अक्सर,
मस्जिद के पिछवाडे आकर..
ईटों की दीवार से लगकर,
पथराए कानो पे,
अपने होठ लगाकर,
इक बूढे अल्लाह का मातम करती हैं,
जो अपने आदम की सारी नस्लें उनकी कोख में रखकर,
खामोशी की कब्र में
जा
कर लेट गया है- गुलज़ार

दृष्टिकोण
बाजार की मार  
से बेजार किताबें - संजय द्विवेदी

फीचर

जारी है हिन्दी की सहजता को नष्ट करने की साजिश -आईएएनएस

पुस्तक अंश
वन नाइट एट कॉल सेंटर
फाइव पॉइंट समवन

नये ब्लाग
फिलहाल -
बोलो जी - मनीषा कुलश्रेष्ठ

कहानियां

मेरी फर्नांडिस क्या तुम तक मेरी आवाज पहुंचती है?- धीरेन्द्र अस्थाना
बोरीवली... कांदिवली...मालाड...गोरेगांव... मेरी फर्नांडिस।
मेरी फर्नांडिस? हड़बड़ा कर मेरी आंख खुल गई। गाड़ी जोगेश्वरी पर रुकी थी। गोरेगांव से अगला स्टेशन जोगेश्वरी ही होता है और गाड़ी जोगेश्वरी पर ही रुकी भी थी। तो फिर? गोरेगांव के बाद मेरी उनींदी स्मृति में जोगेश्वरी के बजाय मेरी फर्नांडिस क्यों उतर आई?
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मायकल लोबो - गोविन्द मिश्र 
मायकल लोबो तो वही था-टुटरूँ टूँ, गोवा कि पैंट-कमीज-कोट में कोई बाँस का एक पतला टुकड़ा गलती से डाल गया और डालकर भूल गया। रंग धुर काला, सिगरेट पी-पीकर और भी काला। काले के ऊपर पीलेपन की गोट। दाँत ... ऍंधेरे में चमकती कोई सफेद लहर नहीं, बल्कि ढहती हुई इमारत की जहाँ-तहाँ से उखड़ती ईटें। हाथ-पैर लुंजपुंज। दाहिने हाथ की दो उँगलियाँ सिगरेट को बराबर थामें, हल्के काँपती
हुई।
-आगे पढें

दृष्टिकोण

याञा वृत्तांत
सतपुड़ा के भीतर से -गोविन्द मिश्
सतपुड़ा से मेरा परिचय तब हुआ था, जब मैं मुंबई से अपने उपन्यास को आगे बढ़ाने के ख्याल से दसेक दिनों के लिए पचमढ़ी पहली बार गया। छोटी पहाड़ियां, छोटे कद के वृक्ष किंतु घने, हर्र-बघर्रा-आंवला की गंध से सराबोर जंगल। आगन्तुक को, बशर्ते वह शहर की चीज़ें शहर में छोड़कर खुद को खाली करके आए, अपने आगोश में ले लेने वाला, आत्मीयता की ऊष्मा से भर देने वाला ... सतपुड़ा। -आगे पढें

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 व्यंग्य

आई पी एल बनाम चुनाव -पंकज प्रसून
हाल-ए- दिल  -पंकज प्रसून
एक्सपर्ट निंदक  -पंकज प्रसून
हिट कवि बनने के नुस्खे
-पंकज प्रसून

निबंध
विजय तेन्दुलकर का ‘होना’ आज उनके ‘न होने’ से बहुत बडा है... -सत्यदेव त्रिपाठी

 

  • कैंसर कोशिकाओं से बेहतर ढंग से निपटेगा नया जीन
  • फंफूद संक्रमदृणों के इलाज के लिए प्रभावी दवा का आविष्कार
  • स्टेम कोशिका खुद को नया रूप देने में सक्षम
  • 'टूटे' दिल को जोड़ने के करीब पहुंचे वैज्ञानिक
  • मुंहासों से छुटकारा चाहिए, तो करें चाकलेट से तौबा!
  • कैंसर और ह्रदय संबंधी रोगों से बचने के लिए हंसना है जरूरी
  • दिल का आकार बिगाड़ सकता है सिगरेट का धुआं
  • जर्मनी में एड्स के मरीज का सफल इलाज
  • च्यूइंग गम चबाइए, चिंता भगाइए
  • अल्जाइमर रोक सकते हैं अंगूर के बीज

    "वेब साईट पर लोग आपस में जुडे रह कर एक दूसरे से संवाद एवम् वाद बिवाद कर सकें, इसके लिये हम आपके लिये लाये हैं यह सी-बाक्स। इसका भरपूर उपयोग करें।"

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