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8 मार्च : अर्न्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

पुस्र्षसत्तात्मक समाज में स्वयंसिद्धाएं

कहते हैं जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवता बसते हैं।
यह हमारे भारतीय संस्कारों के मूल में है। स्त्री शांति और शक्ति दोनों का प्रतीक है इसीलिए हमने हमारे देश और जन्मभूमि को भारत माता माना है। भारत मां जिसने अपनी कोख से कई स्त्री रत्नों को जन्म दिया। जिन्होंने हमारे देश का नाम रोशन किया।


न जाने कितने प्राचीन समय से स्त्री इस पुस्र्षसत्तात्मक संसार का एक हिस्सा रही है, किन्तु धीरे धीरे निश्चित तौर पर उसकी भूमिका बदल गयी, पुस्र्ष के अधीन रहने की जगह उसने अपनी स्वतन्त्र सत्ता बना ली।
आज उसने हर क्षेत्र और जीवन के हर स्तर पर अपने लिये एक जगह बना ली है। । आज स्त्री समाज की आत्मशक्ति है। इसी शक्ति के माध्यम से समाज का भविष्य सुनहरा होता है।
इतिहास इसका साक्षी रहा है। हमारे इतिहास में नक्षत्रों की तरह चमकती एक नहीं कई वीरांगनाएं हैं, जिन्होंने भारतीय इतिहास को नयी दिशा दी है।
आज अर्न्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम उन भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों और का सम्मान करते हैं, जिसकी वजह से भारत की लाखों स्त्रियों के जीवनस्तर में सुधार हुआ है।

अपने उददेश्यों के प्रति उनके इस समर्पण, प्रतिबद्वता और उनके पराक्रम को तथा इस पाकृतिक व सामाजिक तौर पर पुस्र्षसत्तात्मक समाज में उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों में धैर्य न खोने के उनके साहस को आज हम नमन करते हैं।      

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मार्च 4, 2006

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