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अबके सर्दियाँ

1
बर्फ बन जो चल पड़ी हूँ
दूर जमीं की ओर
बादल से बिछुड़ हवाओं में
खोई मैं बहुत हूँ
ये अलग बात है
आँचल नहीं भीगा
धरा के सीने पर
रोई मैं बहुत हूँ।।
2
अबके सर्दियाँ
अनमनी सी आईं
हिमपात के मौसम में
बर्फ नहीं गिरती
कुछ सोच कर रास्ते में ही
पिघल जाती है।।
3
बदरा तेरे ढलते आसूँ
पथरा कर जम गये
हिमकणों के फूल से
बिखरे जमीन पर।।
4
पिया कहूँ तुझसे मै क्या
तू मौसम और मैं हूँ हवा।।

नीलम जैन
 


   
 

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