अभिव्यक्ति की रेखाएँ 
बहुत कुछ होते हैं लोग छुपाए
पर उन्हें अभिव्यक्ति दे ही देती हैं रेखाएँ। 
खुशियाँ समेटे हो दामन में
या गम को हो गले लगाए
बिखेरी हो मुसकान
या हो अश्क बहाए।

अभिव्यक्तियाँ .......... 

बचपन की घड़ियाँ
जमीं पर बड़िया -
उभरते चित्र
कहते मित्र
हिला-मिला कर
क्या हो बनाए।
 अभिव्यक्तियाँ ..............
 

ये मद-मस्त जवानी
छोड़ चुके दादी-नानी की कहानी

बदलाव के वास्ते
बनाते क्रान्ति के रास्ते
अब कलम भी होती उँगलियाँ उठाए।

 अभिव्यक्तियाँ ........... 

चाँद का मुँह टेड़ा है
झुर्रियों का बखेड़ा है
ये बुढ़ापा भी काँपते-काँपते
अनुभव की दास्ताँ सुनाए।
अभिव्यक्तियाँ ...............
 

सौन्दर्य हमें बहुत भाता है
चक्षुपट खोल चित्त बाहर आता है
ये चीज है वह
ये, चीज है यह ..
कहकर मुस्कुराता है
अनन्त में हम कुछ तो हैं पाए।
अभिव्यक्तियाँ .................

 

- अविनाश बिहारिया आर्य
जुलाई 1 , 2006

 

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