मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home |  Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

You can search the entire site of HindiNest.com and also pages from the Web

Google
 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

   

 

विमला गौड़
(1933-1998) 

Vimla ji was born in Srinagar.She was trained as a psychologist in India and in U.S. She taught psychology in Bombay and also had private practice as a psychotherapist.  She and her husband, Dr. Bhagwan Krishan Gaur migrated to U.S. in 1986.   

Vimla ji had a special knack for languages. She could speak Kashmiri, Punjabi, Hindi, Urdu, Gujarati, Marathi, English and Spanish.  She was deeply interested in Indian culture, music and art. She had formal training as a Sitar player and learned to play Tabla during the last two years of her life. She wrote poetry in Hindi and was fond of reading her poems whenever the occasion presented itself. She had a great flare for dramatics.  She loved to tell stories and crack jokes. 

Those of us who were close to her, still miss her gentle manner, sweet voice and self-deprecating humor. 

Vimlaji's poems published on Boloji are submitted by her husband Dr. Bhagwan Kishan Gaur.

इस बार का सावन

झुके झुके श्याम सघन घन
कसक उठा था किस सुधि से उनका मन।
हृदय की वेदना न उनसे सम्भल पाए
अश्रु बन पीड़ा मन की बरबस ढुलक जाए
तड़पा के शैशव के भोले दिनों की याद जो आए
वापिस आ यादें उन्माद भरे यौवन की रुला जाए।
कैसी व्यथा से भर आया मन
इस बार का बड़ा निर्मम है सावन।
जो प्राण थे, जीवन थे, हर श्वांस में थे समाए
जिन्होंने मिल के आशाओं के सुखद गीत थे गाए
पलकों में भर भर कर नेह रंग अनूठे चित्र उभार लाए
वही सुनहरे स्वप्न सीमाहीन क्षितिज में जा के धुँधलाए।
भीगी भीगी निशा में बस तम का चुम्बन
इस बार का बहुत निष्ठुर है सावन।
न कोई मीत जो इस जीवन को सजा जाए
न आशा किसी के पद चाप सुनने की जो मन को बहला जाए
न कोई सन्देश पिय का मन कलिका जो खिला जाए
न कोई दूत जो मधुमास आने की गुपचुप खबर लाए।
नहीं लगता कभी कट पाएगा यह सूनापन
इस बार तो बहुत निर्दयी लगता है सावन।

-विमला गौड़

Image: TC Malhotra/Newsmakers
 

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

             

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  संस्मरण | सृजन साहित्य कोष |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

HomeBoloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2015 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manishakuls@gmail.com