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अनूठे ब्यूटी पार्लर जो एच आई वी
-
एड्स
के प्रति जागरुक कर रहे हैं

सेलम (विमेन्स फीचर सर्विस) : ब्यूटी पार्लर अपने ग्राहकों के लिए एक गुलदस्ते के समान है, एक खिलता व्यवसाय। चमेली, पार्लर की मुख्य सौंदर्य प्रसाधक, अपने दुकान के तल पर कभी के-सजावट तो कभी भोंहो से फालतू बाल हटाना, कभी बीच में ज़ड़ी-बूटी से मुख में चमक लाने के काम का निरीक्षण में व्यस्त है। पार्लर के काउन्टर में चमकती कांच की शीशियां व बड़े हेयर-ब्र और प्रवे-द्वारा पर उपचारार्थ ग्राहकों की सतत कतारें हैं। 

भूल न करें। चमेली की दुकान एक मामूली रूप-सज्जा की दुकान नहीं है। यह एक अनूठा मात्र-ट्रांस्वेस्टाइड पार्लर हैं, जो एचआईवीएड्स की रोक-थाम को समर्पित तमिलनाडु एड्स इनिएशिएटिव (टीएआई) द्वारा चलाया गया है। इसका आय-श्रोत बिल व मिडिंला गेट्स फाउंटेन की आवाहन योजना है। टीएआई ट्रांस्वेस्टाइट (समुद्र-पार से यौन-विशाणु-ग्रसित व्यक्तियों), यौन-कार्यकर्ताओं, अति-दरिद्र औरतों में एड्स-संक्रमण की रोकथाम के लिये राज्य के 14 अति- संक्रमित ज़िलों में पिछले तीन वर्षों से सफलतापूर्वक काम कर रहा है।

टीएआई, जो इस सघन और विशाल सहयोग-योजना को मातृत्व प्रदान करता है, चेन्नई आधारित एनजीओ द्वारा चलाये जा रहे स्वेच्छिक स्वास्थ्य सेवायें हैं, अभी तक 25 एनजीओ के सहयोग और सामंजस्य से राज्य के लगभग 60,000 पुरू और स्त्री यौन-कर्मियों तक पहुंचने में सफल रहा है। ऐसे सदप्रयासों को साधुवाद, तमिलनाडु जो पहले भारत में एचआईवीएड्स से अति- संक्र्रमित राज्यों की सूची में प्रथम था, अब एचआईवी रोगियों की तेजी से बढ़ती संख्या को लगाम लगाने में सफल रहा है। वास्तव में टीएआई एचआईवी की रोक-थाम व नियंत्रण के अपने लक्ष्य-क्षेत्रों में इतना सफल रहा है कि शेष राज्य अब इससे प्रेरणा लेकर इसके दिखाये मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं।

पिछले वर्ष, संगठन को मात्र ट्रांस्वेस्टाइटस (समुद्र-पार से यौन-विशाणु-ग्रसित व्यक्तियों) के लिये अनन्य रूप से संक्र्रमित समाज व जिलों में ब्यूटी पार्लर चलाने का दैदिप्यमान विचार आया। घटी दरों पर और आरामदायम वातावरण में समुद्र-पार के यौन रोगी उपचारार्थ आने लगे। रूप-उपचार के बाद ग्राहकों को चिकित्सक के पास एड्स की जांच, जिसको कि पूर्ण-रूप-सज्जा की घटी दर में शामिल किया गया, के लिये भेजा जाता है। लेकिन यह स्पष्ट रूप से इन पार्लरों में संदे के साथ मालि है'' क्योंकि चिकित्सा करते हुये ट्रांस्वेस्टाइटस स्वास्थ्य-कर्मी अपने ग्राहकों से सुरक्षित यौन-सम्बन्ध, निरोध का सही उपयोग और सुंदर चेहरे के साथ स्वस्थ रीर के महत्व को भी समझाते हैं। यह एक रोचक बात है, टीएआई के समाज में बहुत से काम करने वालों ने अब इनके व्यावसायिक कार्यक्रम के तहत सौन्दर्य प्रसाधक के प्रशिक्षण के बाद यौन-कर्मी का काम बंद कर दिया है।

 

टीएआई के 32 क्लीनिक (चिकित्सा केन्द्र अपने स्ट्रक्चर्ड इंटर्मिटेडथिरैपी (एसआईटी) चिकित्सा से लगभग 50,000 व्यक्तियों के यौन- संक्रमित बिमारी का इलाज करते हैं। एक साल पहले मात्र 60 व्यक्तियों की तुलना में अब 600 व्यक्ति क्लीनिक में इलाज के लिए आते हैं। इससे भी आगे, संगठन के 'सुंदरमुखी' और 'नाम' कार्यक्रम, जिनका उद्देश्य भय को भगाना है और एचआईवी संक्रमित  लोगों में स्वास्थ्य लाभ व्यवहार का संर्धन करना रहा है, सफल रहे हैं। टीएआई यौन-कर्मियों, ट्रांस्वेस्टाइटस, एचआईवी प्लस लोगों और अत्यंत गरीब औरतों को व्यवसायिक विकल्प के रूप में कपड़े सिलाई, सौन्दर्य-प्रसाधन, पकवान बनाना, उद्यमिता, कला व शिल्प-कला जैसी विधाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिलाना है।

टीएआई अधिकार-हीन लोगों के सुगमता से अत्याचारों का शिकार बनने की समस्या पर विचार करता है'' डॉ. लक्ष्मी बाई, टीएआई की योजना निदेषक व समुदाय चिकित्सा विस्तार से बताती हैं, ''उनका निम्न-स्वाभिमान व गरीब सामाजिक - आर्थिक वातावरण, इन लोगों को सभी प्रकार के यौन-संक्रमणों में सहज ही फंसा देता है, तथापि एक समुदाय-आधारित दृश्टिकोण उन लोगों को यह एहसास देता है कि यह उनका अपना कार्यक्रम है क्योंकि उनको भी निर्णय लेने में शामिल किया जाता है।'' 

जब से एचआईवी विषाणु को पहली बात भारत में तमिलनाडु में 1986 में पाया गया, तब से इस राज्य में आज तक लगभग 240,000 लोग इस रोग से ग्रसित हैं। सामाजिक सहयोग एड्स की रोकथाम व नियंत्रण में निर्णायक हो गया है। इसी कारण टीएआई जैसे संगठन विषाल रूप से विभिन्न प्रकार के बिखरे पड़े समूहों - एचआईवीएड्स से ग्रसित यौन-कर्मी, ट्रांस्वेस्टाइटस और अधिकार-हीन लोगों को एकत्र कर स्वास्थ्य-सेवा प्रदाताओं, सरकार व स्वयंसेवी संगठनों के साथ एक ही मंच पर लाता है।

 टीएआई के केंद्रों में, ट्रांस्वेस्टाइटस दो प्रकार के काम करते हैं - एड्स परामर्श-दाता और समुदाय सलाहकार का - जो एड्स के बारे में सूचना का प्रसारण, यौन-जनित-संक्रमण और दूसरे ट्रांस्वेस्टाइटस में निरोध का वितरण।

मीनाक्षी, एचआईवी 'टीएआई' की परामर्शदाता व तमिलनाडु एड्स नियंत्रण सोसाइटी और दक्षिण भारत एड्स एक्षन प्रोग्राम की प्रवक्ता ने पोजिटिव मदर्स डेवलपमेंट की स्थापना में मदद की जिससे अलग हुई औरतों को टीएआई की छत्रछाया में लाया गया। ''जब सबसे पहले मैं टाई केन्द्र में आई मैं डरी हुई थी। लेकिन अब मैं बिल्कुल सहजता से लोगों को निरोध के प्रयोग और 'टीएआई' की अनूठी सेवाओं के बारे में बता सकती हूं'', उसने बताया।

'टीएआई' दो नयी क्रांतिकारी पहल भी प्रदान करता है - अक्षय पत्रम और वस्त्र धानम - जो अति-दरिद्र औरतों को भोजन व कपड़े देते हैं जिससे कि उनको वैशयावृति के चंगुल में फंसने से बचाया जा सकता है। ''जब मैं पहली बार 'टीएआई' केन्द्र में आई मैं चिथड़े में थी। आज मेरे पास 6 जोड़े कपड़े हैं और अपने बच्चों व स्वयं के लिये पर्याप्त भोजन है'', सारदा, 18 वर्ष, गर्व से कहती है।

प्रभा, दूसरी - 'टीएआई' समुदाय नेत्री कहती है, ''मेरे पति मेरी पति-भक्ति पर क करते थे... विवाह के बाद शीघ्र ही उसने मुझे सहयोग देना बंद कर दिया। मेरे पास अपने व बच्चे के पालन-पोण के लिये कुछ नहीं था, इसलिए मैं देह-व्यापार के धंधे में फंसती चली गयी। तभी ''टीएआई' ने मुझे उस बीते अधम के चंगुल से भावनात्मक सहयोग व व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर छुड़ाया।''

यूएनएआईडीएस के अनुसार, भारत में 6 मिलियन से अधिक एचआईवीएड्स संक्रमित व्यक्ति हैं। चूंकि इस बीमारी का धब्बा भारत में बहुत गहरा है, विषेशज्ञ दोहराते हैं कि चिकित्सा सहायता के अलावा एड्स की रोकथाम व नियंत्रण में समाज की सहायता निर्णायक होगी। इसीलिये समाज-समर्थित व संवेदनशील संगठन जैसे टीएआई एक प्रगति-सम्बर्धक का काम करता है।

 नीता लाल (साभार : विमेन्स फीचर सर्विस)

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