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अनिरुद्ध उमट :  मरुस्थल के भीतर से

1.

अपने दुःख तुम
नहीं
लिखेगा
कोई और
किसी और की
छाया
होगी
सीढ़ियों पर
न नयन
न स्वर
होंगे शब्द
खाली
सर्वाधिक
उनका अकेलापन होगा
कहीं
मरुथल
में।
 

2.

एक आँसू
गिरा
नमक की
डली सा
खारा
पी गई
रेत
क्षण में ही
जन्मों की हो
प्यासी ज्यूँ
कंठ में
पारे सी
प्यास
चिलक रही


 

अनिरुद्ध उमट
28 नवंबर 2014  


 

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